चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
पृष्ठ 438, कुल 639 में से
संदर्भ में पढ़ें४२० चरकसंहिता [ अ० १ तत्र पूर्वरूपदर्शने ज्वरादौ वा हितं लघ्वशनमतर्पणं वा ज्व- रस्याऽऽमाशयसमुत्थत्वात् ततः कषायपानाभ्यङ्ग-स्वेद-प्रदेह-परिषेकानुले- पन-वमन-विरेचनाऽऽस्थापनअनुवासनोपशमन-नस्तःकर्म-धूप-धूमपाना- ञ्जन-क्षीरभोजन-विधानं च यथास्वं युक्त्या प्रयोज्यम् । ज्वर के चिकित्सा सूत्र—ज्वर के पूर्व रूप होने पर अथवा ज्वर के प्रारम्भ में ही हलका अन्न सेवन करना अथवा लंघन करना चाहिये । क्योंकि ज्वर आमाशय से उत्पन्न होता है । इसके अनन्तर कषाय ( क्वाथ ) अभ्यंग, स्वेद प्रदेह ( लेप ), परिषेक, अनुलोमन ( वात को अनुकूल करने की क्रिया ), वमन, विरेचन, आस्थापन, अनुवासनबस्ति, कर्म उपशमन, नस्यकर्म, धूपन, धूमपान, अंजन और दूध भोजन की कल्पना, यथायोग्य उपयोग करना चाहिये ॥ जीर्णज्वरेषु तु सर्वेष्वेव सर्पिषः पानं प्रशस्यते, यथास्वौषधसिद्धस्य सर्पिर्हि स्नेहाद्वातं शमयति, संस्कारात्कफं, शैत्यात्पित्तमूष्माणं च । तस्माज्जीर्णज्वरेषु तु सर्वेष्वेव सर्पिर्हितमुदकमिवाग्निप्लुतेषु द्रव्येष्विति १८ जीर्णज्वर में घृतपान—सब प्रकार के जीर्ण ज्वरों में घी का पान करना प्रशस्त है । इसके लिये योग्य रीति से ओषधियों द्वारा सिद्ध किया घी काम में लाना चाहिये । चिकना होने से घी वायु का शमन करता है, भिन्न २ ओष- धियों के संस्कार से कफ को शीतलता से पित्त और उष्मा को शान्त करता है । इसलिये सब प्रकार के जीर्णज्वरो में घी ऐसा ही हितकारक होता है जिस प्रकार कि आग से जलते हुए पदार्थों के लिये पानी हितकारक है ॥१८॥ भवन्ति चात्र—यथा प्रज्वलितं वेश्म परिषिञ्चन्ति वारिणा । नराः शान्तिमभिप्रेत्य तथा जीर्णज्वरे घृतम् ॥ १९ ॥ स्नेहाद्वातं शमयति, शैत्यात्पित्तं नियच्छति । घृतं तुल्यगुणं दोषं संस्कारात्तु जयेत्कफम् ॥ २० ॥ नान्यः स्नेहस्तथा कश्चित्संस्कारमनुवर्तते । यथा सर्पिरतः सर्पिः सर्वस्नेहोत्तमं मतम् ॥ २१ ॥ संस्कारसिद्ध घृत—जिस प्रकार आग से जलते हुए घर को बुझाने के लिये मनुष्य पानी डाला करते हैं, उसी प्रकार जीर्णज्वर में घृत का उपयोग उत्तम है घी स्नेह गुण से वायु को, शीतगुण से पित्त को तथा जिस ओषधि से सिद्ध किया जाता है उस ओषधि का गुण लेकर कफ को शान्त करता है । घृत की श्रेष्ठता—जिस प्रकार घी दूसरी दवाईयों के गुण अपने में ग्रहण