भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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अ० ८ ] विमानस्थानम् ५६७ तत्र सर्वैः सारैरुपेतः पुरुषा भवन्त्यतिबलाः परमगौरवयुक्ताक्ले- शसहाः सर्वारम्भेष्वात्मनि जातप्रत्ययाः कल्याणाभिनिवेशिनः स्थिर- समाहितशरीराः सुसमाहितगतयः सानुनाद-स्निग्ध-गम्भीर-महास्वराः सुखैश्वर्यवित्तोपभोगसंमानभाजो मन्दजरसो मन्दविकाराः प्रायस्तु- ल्यगुणविस्तीर्णापत्याश्चिरजीविनश्च भवन्ति ॥ ११२ ॥ [ इनमें सब सारों की विशेषता से बल प्रमाण तीन प्रकार का है। यथा—उत्तम, मध्यम और अधम । ] इनमें जो पुरुष उपरोक्त आठों प्रकार के उत्तम सारों से युक्त होते हैं, वे अति बलवान्, अत्यन्त सुख से युक्त, क्लेश सहने वाले, सब कार्यों में समर्थ होने से प्रयत्नवान्, शुभ कार्यों में मन लगाने वाले, स्थिर और संहत शरीर वाले, सुधीर गतिवाले, प्रतिध्वनि से युक्त स्निग्ध, गम्भीर एव महान् स्वर वाले, सुख-ऐश्वर्य, वित्त, संमान का भोग करने वाले, अल्प जरा वाले, थोड़े रोग वाले, प्रायः अपने ही समान तुल्य गुण वाले, बहुत से चिरंजीवी पुत्रोंवाले होते हैं ॥ ११२ ॥ अतो विपरीतास्त्वसाराः ॥ ११३ ॥ इन उपरोक्त लक्षणों से विपरीत लक्षणों वाले पुरुष सारहीन होते हैं ॥११३॥ मध्यानां मध्यैः सारविशेषैर्गुणविशेषा व्याख्याता भवन्ति इति साराण्यष्टौ पुरुषाणां बलप्रमाणविशेषज्ञानार्थान्युपदिष्टानि भवन्ति ॥११४॥ प्रवर और अवर के मध्यस्थ सार विशेषों से मध्यमसार के पुरुष होते हैं । इस मध्यम सार से ही इनके गुण समझ लेने चाहियें । इस प्रकार से बल- प्रमाण को विशेष रूप में जानने के लिये इन सारों की व्याख्या कर दी है ॥११४॥ कथं नु शरीरमात्रदर्शनादेव भिषङ् मुह्येदयमुपचितत्वाद् बलवान्, अयमल्पबलः कृशत्वात्, महाबलवानयं महाशरीरत्वात्, अयमल्पशरीर- त्वादल्पबल इति; दृश्यन्ते ह्यल्पशरीराः कृशाश्चैके बलवन्तः, तत्र पिपी- लिकाभारहरणवत्सिद्धिः । अतश्च सारतः परीक्षेतेत्युक्तम् ॥११५॥ वैद्य केवल शरीरमात्र के दर्शन से धोखा भी खा जाता है, भरा पूरा शरीर होने से यह बलवान् है, यह मनुष्य कृश होने से अल्पबलवाला है, इसका शरीर बड़ा है, इससे यह मनुष्य बड़ा भारी बलवान् है। यह अल्प शरीर होने से अल्पबलवाला है इत्यादि । परन्तु देखा जाता है कि अल्प शरीर वाले और पतले दुबले व्यक्ति भी बलवान् होते हैं । जिस प्रकार चिउंटी अपने से तिगुने चौगुने बोझ को भी उठा लेती है, उसी प्रकार पतले व्यक्ति भी सार के कारण बलवान् होते हैं और वे अनेक कार्य कर लेते हैं। इस कारण सार से परीक्षा करनी चाहिये यह कहा है ॥११५॥