चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
पृष्ठ 76, कुल 639 में से
संदर्भ में पढ़ें५८ चरकसंहिता [ अ० ४ सारिवा-शर्करा-पाठा-मञ्जिष्ठा-द्राक्षा-पीलु-परूषकाभयामलक-बिभी- तकानीति दशेमानि ज्वरहराणि भवन्ति ॥ (३९) ॥ सारिवा ( अनन्तमूल ), शर्करा ( मिश्री ), पाठा ( पाढ़ल ), मंजिष्ठा ( मजीठ ), द्राक्षा ( किशमिश ), पीलु, परूषक ( फालसा ), अभया ( बड़ी हरड़ ), आमलकी ( आंवला ), विभीतक ( बहेड़ा ), ये दस 'ज्वरहर' अर्थात् ज्वर नाशक हैं ॥ द्राक्षा-खर्जूर-पियाल-बदर-दाडिम-फल्गु-परूषकेक्षु-यव-षष्टिका इति दशेमानि श्रमहराणि भवन्ति ॥ (४०) ॥ इति पञ्चकः कषायवर्गः ॥ [ ८ ] ॥ द्राक्षा ( किशमिश ), खर्जूर (पिण्डखजूर), पियाल (प्याल चिरौंजी फल), बदर ( बेर ), दाडिम ( अनार ), फल्गु ( अंजीर ), परूषक ( फालसा ), इक्षु ( ईख ), यव ( जौ ), षष्टिक ( साठ चावल ) ये दस 'श्रमहर' अर्थात् थका- वट को मिटाते हैं ॥ यह पाँच से बना 'कषायवर्ग' है । लाजा-चन्दन-काश्मर्यफल-मधुक-शर्करा-नीलोत्पलोशीर-सारिवा-गु- डूची-ह्रीबेराणीति दशेमानि दाहप्रशमनानि भवन्ति ॥ ( ४१ ) ॥ लाजा ( खील ), चन्दन ( श्वेत चन्दन ), काश्मर्य-फल ( गम्भारी फल ) मधुक ( मुलहठी ), शर्करा ( मिश्री ), नीलोत्पल (नीला कमल), उशीर (खस) सारिवा ( अनन्तमूल ), गुडूची ( गिलोय ), ह्रींवेर ( नेत्रवाला ), ये दस 'दाह- प्रशमन' अर्थात् जलन कम करते हैं ॥ तगरागुरु-धान्यक-शृङ्गवेर-भूतीक-वचा-कण्टकारिकाग्निमन्थ-श्यो- नाक-पिप्पल्य इति दशेमानि शीतप्रशमनानि भवन्ति : (४२) ॥ तगर, अगुरु ( अगर ), धान्यक ( धनिया ), शृङ्गवेर ( सोंठ ), भूतीक ( अजवायन ), वचा, कण्टकारिका (छोटी कटेरी) अग्निमन्थ (अरणी), श्योनाक ( टेंटू ), और, पिप्पली, ये दस 'शीत-शप्रशमन' अर्थात् शीतनाशक हैं। तिन्दुक-पियाल-बदर-खदिर-कदर-सप्तपर्णाश्वकर्णार्जुनासनारिमेदा इति दशेमान्युदर्दप्रशमनानि भवन्ति ॥ (४३) ॥ तिन्दुक ( तेंदू), पियाल ( चिरौंजी का फल ), बदर (बेर), खदिर (खैर), कदर ( सफेद खैर १ ), सप्तपर्ण ( सातवन ) अश्वकर्ण ( साल ), अर्जुन, असन १. कदर —'सोमवल्कस्तु रीठायांकदरे कृष्णगर्भेके' । ध० निघण्टु ।