धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८ ] धम्मपदं [ १।१८ श्रावस्ती ( जेतवन ) देवदत्त १७-इध तप्पति पेच्च तप्पति , पापकारी उभयत्थ तप्पति । पापं मे कतन्ति तप्पति , भीय्यो तप्पति दुग्गतिङ्गतो ॥१७॥ ( इह तप्यति प्रेत्य तप्यति पापकारी उभयत्र तप्यति । पापं मे कृतमिति तप्यति, भूयस्तप्यति दुर्गतिंगतः ॥१७॥ ) अनुवाद—यहाँ सन्तप्त होता है, मरकर सन्तप्त होता है, पापकारी दोनों जगह सन्तप्त होता है । "मैंने पाप किया है"—यह ( सोच ) सन्तप्त होता है , दुर्गति को प्राप्त हो और भी सन्तप्त होता है । श्रावस्ती ( जेतवन ) सुमना देवी १८-इध नन्दति पेच्च नन्दति , कतपुञ्ञो उभयत्थ नन्दति । पुञ्ञं मे कतन्ति नन्दति , भीय्यो नन्दति सुगतिंगतः ॥ १८॥ ( इह नन्दति प्रेत्य नन्दति कृतपुण्य उभयत्र नन्दति । पुण्यं मे कृतमिति नन्दति, भूयो नन्दति सुगतिंगतः ॥१८॥ ) अनुवाद—यहाँ आनन्दित होता है, मरकर आनन्दित होता है । जिसने पुण्य किया है, वह दोनों जगह आनन्दित होता है । "मैंने पुण्य किया है"—यह ( सोच ) आनन्दित होता है ; सुगति को प्राप्त हो और भी आनन्दित होता है ।