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दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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ॐ मुमुक्षु भवन : वेद वेदाङ्ग पुस्तकालय ॐ वाराणसी ३६८२ आगत क्रमांक..................... दिनांक..................... श्रीहरिः नम्र निवेदन दोहावली प्रातःस्मरणीय भक्तकुल-चूड़ामणि गोस्वामी तुलसी- दासजीकी प्रमुख कृतियोंमें है और भक्त-समाजमें इसका बहुत आदर है। गोस्वामीजीने अपनी अनुभूतियोंको बड़े ही भावपूर्ण दोहोंमें व्यक्त किया है। भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सदाचार, प्रेम, नीति आदि विविध विषयोंपर इतने सरस दोहे गोस्वामीजीकी कृतियोंके अतिरिक्त शायद ही कहीं मिलें। भक्तकी प्रासादिक वाणीका आनन्द और मिल ही कहाँ सकता है ? भगवान्‌की असीम अनुकम्पासे ही उनके भक्तोंकी अमृतवाणीके रसास्वादनका सौभाग्य प्राप्त होता है। दोहावलीकी टीका लिखते समय मेरा कुछ समय श्रीरामचर्चामें बीता, इसका मुझे अपार आनन्द एवं परम संतोष है। वस्तुतः जितना समय भगवान् और उनके भक्तोंकी चर्चामें बीते उतना ही समय सफल एवं सार्थक समझा जाना चाहिये। टीका लिखते समय स्थान-स्थानपर स्वर्गीय लाला भगवानदीनकी टीकासे सहायता ली गयी है। जिसका आभार हम सविनय स्वीकार करते हैं। मेरे सम्मान्य पं० श्रीचिम्मनलालजी