दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)
Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ६ ] विषय पृष्ठ-संख्या ३९—राममहिमाकी अज्ञेयता ६९ ४०—श्रीरामजीके स्वरूपकी अलौकिकता ६९ ४१—ईश्वरमहिमा ६९ ४२—श्रीरामजीकी भक्तवत्सलता ७० ४३—सीता, लक्ष्मण और भरतके रामप्रेमकी अलौकिकता ७० ४४—भरत-महिमा ७१ ४५—लक्ष्मण-महिमा ७३ ४६—शत्रुघ्न-महिमा ७३ ४७—कौसल्या-महिमा ७४ ४८—सुमित्रा-महिमा ७४ ४९—सीता-महिमा ७४ ५०—रामचरित्रकी पवित्रता ७४ ५१—कैकेयीकी कुटिलता ७५ ५२—दशरथ-महिमा ७५ ५३—जटायुका भाग्य ७७ ५४—रामकृपाकी महत्ता ७८ ५५—हनुमत्स्मरणकी महत्ता ७८ ५६—बाहुपीड़ाकी शान्तिके लिये प्रार्थना ८० ५७—काशी-महिमा ८१ ५८—शंकर-महिमा ८१ ५९—शंकरजीसे प्रार्थना ८१ ६०—भगवल्लीलाकी दुर्ज्ञेयता ८२ ६१—प्रेममें प्रपञ्च बाधक है ८२ विषय पृष्ठ-संख्या ६२—अभिमान ही बन्धनका मूल है ८२ ६३—जीव और दर्पणके प्रति- बिम्बकी समानता ८३ ६४—भगवन्मायाकी दुर्ज्ञेयता ८३ ६५—जीवकी तीन दशाएँ ८४ ६६—सृष्टि स्वप्नवत् है ८४ ६७—हमारी मृत्यु प्रतिक्षण हो रही है ८४ ६८—कालकी करतूत ८५ ६९—इन्द्रियोंकी सार्थकता ८५ ७०—सगुणके बिना निर्गुणका निरूपण असम्भव है ८५ ७१—निर्गुणकी अपेक्षा सगुण अधिक प्रामाणिक है ८६ ७२—विषयासक्तिका नाश हुए बिना ज्ञान अधूरा है ८६ ७३—विषयासक्त साधुकी अपेक्षा वैराग्यवान् गृहस्थ अच्छा है ८७ ७४—साधुके लिये पूर्ण त्यागकी आवश्यकता ८७ ७५—भगवत्प्रेममें आसक्ति बाधक है; गृहस्थाश्रम नहीं ८८ ७६—सन्तोषपूर्वक घरमें रहना ही उत्तम है ८८