भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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[ ६ ] हिंडोला तथा होली आदि सुललित और करुण भावोंका बड़ा ही विशद और मर्मस्पर्शी वर्णन मिलता है। बालकाण्डके आरम्भमें भगवान्‌के बालरूपका, अन्तमें जनकपुरकी स्त्रियोंद्वारा उनकी किशोरमूर्तिका, अयोध्याकाण्डमें ग्रामीण स्त्रियोंद्वारा प्रभुके तापसवेषका तथा उत्तरकाण्डमें उनके राजवेषका बड़ा ही अनूठा नख-शिख कहा गया है। परन्तु इतना होनेपर भी गोसाईंजीने अपना मर्यादा-रक्षणका स्वभाव नहीं छोड़ा। छोड़ते कैसे ? यह कोई कवि-कल्पनामात्र तो है नहीं; यह तो उनका प्रत्यक्ष अनुभव है। उनके प्रत्येक पदमें उनके परम पुनीत दास्यभावकी छाप लगी हुई है। इस प्रकार यह ग्रन्थरत्न भक्तिरसज्ञ और साहित्यमर्मज्ञ दोनोंहीका धन है। इन पंक्तियोंके लेखकमें तो इनमेंसे किसी भी सम्पत्तिका लेशमात्र भी नहीं है। श्रद्धेय मित्रवर पं० श्रीलालजी याज्ञिकके मुखसे भरतमिलाप और जटायु-उद्धार-सम्बन्धी कुछ पद सुनकर इसके हृदयमें इस ग्रन्थके अनुवादका मूक संकल्प हो गया और यह उसका सुयोग देखने लगा। भगवान्‌की असीम कृपासे आज वह संकल्प पूरा हो गया। यह उन लीलामयकी ही लीला है कि मुझ-जैसे विद्या-भक्ति-विवेकहीन व्यक्ति को, इच्छा न रहते हुए भी, इस धंधेमें जोड़ रखा है। जो हो, 'राजी हैं हम उसीमें जिसमें तेरी रजा है।' अबतक इस ग्रन्थके कई संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। सरस्वतीभण्डार पटनाद्वारा प्रकाशित पाण्डेय श्रीरामावतार शर्माकी प्रति बी० ए० परीक्षाकी पाठ्यपुस्तकोंमें स्वीकृत है। उसके अनुसार इसके बालकाण्डमें १०८, अयोध्याकाण्डमें ८६, अरण्यकाण्डमें १७, किष्किन्धाकाण्डमें २, सुन्दरकाण्डमें ५१, लंकाकाण्डमें २६ और उत्तरकाण्डमें ३६-इस प्रकार कुल ३२८