भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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[ ७ ] पद हैं। यही क्रम नागरीप्रचारिणी सभाद्वारा प्रकाशित तुलसी- ग्रन्थावलीकी प्रतिमें तथा श्रीरामनारायण बुकसेलरद्वारा प्रकाशित श्रीवामदेवजीकी टीकामें भी है। परन्तु नवलकिशोरप्रेस, लखनऊकी श्रीवैद्यनाथजीकी टीकावाली और खड्गविलासप्रेसकी महात्मा हरिहरप्रसादकृत टीकावाली प्रतियोंके बालकाण्डकी पदसंख्या इससे भिन्न है। पद तो सभी प्रतियोंमें एक-से ही हैं, अन्तर केवल उनकी गणनामें है। प्रस्तुत पुस्तकके बालकाण्डमें जो १२ से लेकर १५ वें तक चार पद हैं, उन्हें पहली तीन प्रतियोंमें एक माना है तथा ३७वें पदको दो माना है। हमें उनका मत ठीक नहीं मालूम होता, क्योंकि पुस्तकके सभी पदोंमें यह क्रम रहा है कि प्रत्येक पदके अन्तिम चरणमें गोसाईंजीका नाम रहता है। इस न्यायसे खड्ग- विलास और नवलकिशोर-प्रेसोंकी प्रतियोंका ही पद-विभाग उचित जान पड़ता है और हमने भी उसे ही स्वीकृत किया है। इसलिये इस संस्करणके बालकाण्डकी पदसंख्या ११० है और समस्त पद ३३० हैं। प्रस्तुत पुस्तकके पाठ-संशोधन और अनुवादमें उपर्युक्त सब प्रतियोंसे सहायता ली गयी है तथा इनके सिवा पूज्यपाद श्रीजय- रामदासजी दीन (रामायणी) और श्रद्धेय गोस्वामी श्रीचिम्मन- लालजी एम्० ए० शास्त्रीने भी इस अनुवादकी आद्योपान्त आवृत्ति करके मूल पाठ और अनुवादमें जहाँ-तहाँ संशोधन करनेकी कृपा की है। इसके लिये मैं उपर्युक्त सभी महानुभावोंका अत्यन्त कृतज्ञ हूँ। आशा है, इन सबकी इस प्रसादीके द्वारा पाठकोंका कुछ मनोरञ्जन हो सकेगा। विनीत :- मुनिलाल