भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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श्रीहरिः वर्णानुक्रमणिका

पद-सूचनापृष्ठ-संख्यापद-सूचनापृष्ठ-संख्या
अमिय-बिलोकनि करि कृपा....४७आजु बन्यो है बिपिन२२६
अवध आजु आगमी एकु आयो५०आजुको भोर, और सो, माई२३३
अनुकूल नृपहि सूलपानि हैं१३०आरते बचन कहति बंदेही२७३
अवध बिलोकि हौं जीवत२३६आश्रम निरखि भूले२७७
अवसि हौं आयसु पाइ रहौंगो२५६आये देखि दूत सुनि ...३१६
अतिहि अधिक दरसनकी आरति३१४अपनी अपनी भांति ....३२१
अति भोग बिभीषनके भले ....३४०आइ सचिव बिभीषनके कही३२६
अबहीं मैं तोसों न कहे री ....३४८आली, अब राम-लषन कितह्वैं हैं३७२
अवधि आजुकिधौं ओरौदिनह्वै हैं३७१आजु अवध आनंद बधावन३७६
अवध नगर अति सुंदर ....४२१आजु रघुबीर छबि३६१
आंगन फिरत घुटुरुवनि धाये६४आजु रघुपति-मुख ....३६६
आंगन खेलत आनंदकंद७१आली री ! राघोके ....४१३
आजु सुदिन सुभ घरी सुहाई१७आइ लषन लैं सौंपी सिय ....४३२
आजु महामंगल कोसलपुर ....२५ऋषि संग हरषि चले दोउ भाई६५
आजु अनरसेहैं भोरके, पय ....४५ऋषिराज ! राजा आजु१४२
आजु सकल सुकृत फलु पाइहौं६२ऋषि-नृप सीस ठगोरी सी डारी१६०
आये सुनि कौसिकजनकहरषाने हैं१०५ऋतु-पति आए भलो ....२३०
आली ! काहू तो बूझो न ....२११ए कौन कहांते आए ? ....११०
आली री ! पथिक जे एहि ..२१३एई राम-लषन जे मुनि-सँग१२५
आली! हौं इन्हहि बुझावौं कैसे२६३ऐसे तैं क्यों कटु बचन ....२४१
आइ रहे जबतें दोउ भाई ....२२२कनक-रतनमय पालनो रच्यो५५
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