गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)
Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi
महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 30, कुल 600 में से
संदर्भ में पढ़ें( २४ ) कण्डिका विषय पृष्ठ ३०-ओङ्कार का चिन्तन और उसका फल -- ... ५३ ३१-मौद्गल्य और मैत्रेय की कथा ... ... ... ५४ ३२-मौद्गल्य और मैत्रेय का गायत्री मन्त्र पर वार्तालाप ... ५७ ३३--सावित्री वा गायत्री मन्त्र के चौबीस उत्पत्ति स्थान और बारह जोड़ा ६० ३४-सावित्री वा गायत्री मन्त्र के प्रथम पाद की व्याख्या ... ६२ ३५- सावित्री वा गायत्री मन्त्र के दूसरे पाद की व्याख्या ... ६४ ३६--सावित्री वा गायत्री मन्त्र के तीसरे पाद की व्याख्या --- ६५ ३७- बारह महातत्त्वों की परम्परा ... - ... ६६ ३८--दूसरे प्रकार से पूर्वोक्त बारह तत्त्वों का विचार ... ... ६७ ३६-आचमन के विधान और लाभ ... ... ... ६६ प्रपाठक २ ॥ १-ब्रह्मचारी की महिमा ... ... ... ७५ २-ब्रह्मचारी का सात मनोरागों का दमन आदि कर्तव्य --- ७८ ३-ब्रह्मचारी के कर्तव्य, आचार्य की सेवा आदि कर्म -- ८० ४-ब्रह्मचारी का अनेक पांच अग्नियों का वशीकरण और दूसरा विनीत कर्तव्य ... ... ... ... ८१ ५-जनमेजय का दो हंसों और दन्तावल से ब्रह्मचर्य की महिमा और अड़तालीस वर्ष आदि समय पर वार्तालाप -- --- ८४ ६-ब्रह्मा ने ब्रह्मचारी और उसे भिक्षा देने वाले गृहपति को छोड़कर सब प्रजाओं को मृत्यु को दिया ... ... ८६ ७-ब्रह्मचारी के दोषों का प्रायश्चित्त विधान -- ... ८८ ८-ब्रह्मचारी के आश्रम वा तपोवन ... -- ... ६० ६- होता, अध्वर्यु, उद्गाता और ब्रह्मा का वर्णन ... ... ६४ १०--काबन्धि की मान्धाता के यज्ञ में यज्ञ विषयक वार्ता ... ६८ ११-काबन्धि के देवयजन और ऋत्विजों के विषय में प्रश्नोत्तर -- १०० १२-काबन्धि का अधिक यज्ञ विषयक विचार ... ... १०२ १३-काबन्धि का आगे यज्ञ विषयक विचार ... ... १०२ १४--काबन्धि का देव यजनों के विषय में वर्णन ... ... १०४ १५-अदिति की सृष्टि रचना के दृष्टान्त से भौतिक यज्ञ की रचना ... १०५ १६--ब्रह्मज्ञानियों को चार चार प्रकार से ब्रह्मप्राप्ति -- ... १०८ १७-ईश्वर मानने वाले की महिमा ... ... ... ११० १८ विघ्नों को हटाकर अश्वनामक अग्नि की स्थापना ... ११२ १६-आख्यायिका-असुरों से इन्द्र द्वारा देवताओं की रक्षा और अग्न्याधान ... -- ... ... ११५