भारतकोश
गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)

गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)

Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi

महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished600 पृष्ठ

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पृष्ठ 33

( २७ ) कण्डिका विषय पृष्ठ ७—पन्द्रह प्रकार के यज्ञों का क्रम, जिनमें राजसूय, वाजपेय, . ... अश्वमेध, पुरुषमेध आदि सम्मिलित हैं ... ... २२५ ८—प्रजापति की कथा जिसने बहुत यज्ञों को करके आत्मिक यज्ञ से अत्यन्त सुख पाया ... ... ... ... २२६ ६—संवत्सर यज्ञ में आवश्यक कर्मों का विधान ... ... २२६ १०—सहस्र संवत्सर यज्ञ और उसके स्थानापन्न विश्वजित् यज्ञ के विषय में कथा ... ... ... ... २३१ ११—ऋत्विजों की योग्यता के विषय में प्रजापति और नारायण की कथा ... ... ... ... २३४ १२—प्रातःसवन की स्तुति का मन्त्र सोम विषय में ... ... २३६ १३—माध्यन्दिन सवन की स्तुति का मन्त्र सोम विषय में ... २३७ १४—तृतीय सवन की स्तुति का मन्त्र सोम विषय में ... ... २३८ १५—संस्थित सवन में भर्ग आदि चार पदार्थों का दस प्रकार से वर्णन ... ... ... ... २४० १६—भर्गः [ तेज ] का वर्णन ... ... ... २४१ १७—महः वा महत्त्व का वर्णन ... ... ... २४२ १८—यश वा कीर्ति का वर्णन ... ... ... २४३ १६—सर्वं वा सब ज्ञान का वर्णन ... ... ... २४३ २०—दश गुणित चार पदार्थों का विराट् से सम्बन्ध ... ... २४४ २१—यज्ञ के विषय में दध्यङ् और अनर्वा का वार्तालाप ... २४४ २२—मिश्रित यज्ञों का विषय ... ... ... २४६ २३—विविध यज्ञों के विधान और गणना सहित व्याख्यान श्लोकों में ... २४८ २४—तपस्वी वैश्वानर से श्रद्धा में अङ्गिरा ऋषि की उत्पत्ति और वेदों का यज्ञों तथा ऋत्विजों से सम्बन्ध ... ... २५२ २५—ऋग्वेद आदि चारों वेदों के स्थान तथा देवता आदि का वर्णन और यह कि चारों वेद ही त्रयी विद्या हैं ... ... २५६ उत्तर भाग ॥ प्रपाठक १ ॥ १—यज्ञ में ब्रह्मा का आसन, प्रणीता पात्र और परिधियां ... २६० २—प्रजापति का रुद्र को भाग शून्य करना, प्राशित्र का वर्णन, भग सविता आदि का अङ्ग भङ्ग होना और बृहस्पति वा ब्रह्मा का शान्त करना ... ... ... २६३ ३—प्राशित्र [ अन्न ] का विधान - ... २६७