गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)
Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi
महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 411, कुल 600 में से
संदर्भ में पढ़ेंगोपथब्राह्मणे उत्तरभागे प्र० ३ । क० ७ १७३ सजूः ) एक सी प्रीति वाला, ( देवैः ) अच्छे गुणों के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वाला , देवैः ) दिव्य सुख देने वाले ( वयोधायैः ) जीवन आदि वा गायत्री छन्दों से सम्बन्ध वाले प्राणों के साथ ( सजूः ) एकसी प्रीति वाला [ तू हो ], ( वैश्वानराय ) सम्पूर्ण पदार्थों को प्राप्त कराने वाली ( अग्नये ) अग्नि विद्या के लिए ( त्वा त्वा ) तुझको तुझ को ( अध्वर्यू ) हिंसा रहित गृहाश्रम आदि यज्ञ के चाहने वाले ( अश्विना ) सब विद्याओं में व्यापक अध्यापक और उपदेशक दोनों (इह) यहां जगत् में (सादयताम्) स्थापित करें । [ हे स्त्री वा पुरुष ! ] ( ऋतुभिः ) वसन्त आदि ऋतुओं के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वा सेवा वाला (विधाभिः ) विविध वस्तुओं को धारण कराने वाली प्राणों की चेष्टाओं के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वाला, (वसुभिः) अग्नि आदि आठ वसुओं के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वाला; (देवैः ) विजय चाहने वाले (वयोधायैः ) विज्ञानों से सम्बन्ध युक्त विद्वानों के साथ (सजूः ) एक सी प्रीति वाला [ तू हो ], (वैश्वानराय ) सब जगत् के चलाने वाले (अग्नये ) विज्ञान के लिए (त्वा त्वा ) तुझको तुझको ( अध्वर्यू ) हिंसारहित गृहाश्रम आदि यज्ञ के चाहने वाले (अश्विना ) सब विद्याओं में व्यापक अध्यापक और उपदेशक दोनों ( इह ) यहां [जगत् में] (सादयताम्) स्थापित करें । [ हे स्त्री वा पुरुष ! ] ( ऋतुभिः ) वसन्त आदि ऋतुओं के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वा सेवा वाला ( विधाभिः ) विविध वस्तुओं को धारण कराने वाली प्राणों की चेष्टाओं के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वाला, (रुद्रैः) [ प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान, नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त, धनञ्जय और जीव, इन ग्यारह ] रुद्रों के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वाला, ( देवैः ) व्यापार कुशल ( वयोधायैः ) वेद आदि शास्त्रों को जताने के प्रबन्ध करने वालों के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वाला [ तू हो ], ( वैश्वानराय ) सब नरों के सुखसाधक ( अग्नये ) सब शास्त्रों के विज्ञान के लिये ( त्वा त्वा ) तुझको तुझको ( अध्वर्यू ) हिंसारहित गृहाश्रम आदि यज्ञ के चाहने वाले ( अश्विना ) सब विद्याओं में व्यापक अध्यापक और उपदेशक दोनों ( इह ) यहां [ जगत् में ] ( सादय- ताम् ) स्थापित करें । [ हे स्त्री वा पुरुष ! ] ( ऋतुभिः ) वसन्त आदि ऋतुओं के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वा सेवा वाला ( विधाभिः ) विविध प्रकार सत्य धारण कराने वाली क्रियाओं के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वाला, (आदित्यैः) वर्ष के बारह महीनों के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वाला, ( देवैः ) तेजस्वी ( वयोधायैः ) पूर्ण विद्या के विज्ञान और प्रचार के प्रबन्ध करने वालों के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वाला [ तू हो ] ( वैश्वा- नराय ) सब नरों के पूर्ण सुख साधने वाले (अग्नये ) पूर्ण विज्ञान के लिये ( त्वा त्वा ) तुझको तुझको ( अध्वर्यू ) हिंसारहित गृहाश्रम आदि यज्ञ के चाहने वाले ( अश्विना ) सब विद्याओं में व्यापक अध्यापक और उपदेशक दोनों ( इह ) यहां [ जगत् में ] ( साद- यताम् ) स्थापित करें । [ हे स्त्री वा पुरुष ! ] ( ऋतुभिः ) क्षण आदि सब काल अवयवों के साथ ( सजूः ) एक सी प्रीति वा सेवा वाला ( विधाभिः ) सब सुखों में व्यापक क्रियाओं के साथ ( सजूः )