गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)
Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi
महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 595, कुल 600 में से
संदर्भ में पढ़ेंस नः पितेव सूनवे ( ५५७ ) होता यक्षदिन्द्रम् भाग, भाग, मन्त्र आदि प्रपाठक, पृष्ठ मन्त्र आदि प्रपाठक, पृष्ठ कण्डिका कण्डिका स नः पितेव सूनवे उ १, ४ २७० सरस्वत्यनुमन्यस्व उ १, ४ २७० सं ते पयांसि समु उ ३, ६ ३७० सविता प्रसवा उ २, ६ ३२० सन्चिरसि उ २, १३ ३३५ सुतासो मधुमत्तमाः उ ६, १६ ५४६ स पचामि स ददामि पू ५, २१ २४६ सुदितिरसि उ २, १३ ३३५ सप्तास्यासन् परि पू १, १२ २५ सुसमिद्धाय शोचिषे उ १, ४ २७० सप्त ऋषयः प्रतिहिताः पू ३, १२ १५७ सोऽभिध्याय शरीरात् पू १, ३ ६ सप्त ऋषयः प्रतिहिताः उ २, १३ ३३६ सोमः पवते जनिता उ ५, ४ ४६३ सप्त ऋषयः प्रतिहिताः उ ३, ८ ३७६ सोमं मन्यते पपिवान् पू २, ६ ६७ स बृहतीं दिश पू १, १० २२ स्रुताद् यमत्ति पू २, १७ १११ समं ज्योतिः सूर्येण उ ३, १६ ३६५ स्वरादिनिपातम पू १, २६ ४५ समं ज्योतिः सूर्येण उ ४, ४ ४२० स्ववृदसि उ २, १४ ३३६ समं ज्योतिः सूर्येण उ ४, १८ ४५० ह समिधार्गिंन दुवस्यत उ १, ४ २७० हलोऽनन्तराः संयोगः पू १, २७ ४७ समिधार्गिंन दुवस्यत उ ३, १२ ३८५ हिरण्यगर्भः समवर्त्तत पू १, २ ४ सम्राडसि पू ४, १३ ३४८ होता यक्षत् समिधा उ ३, ८ ३७६ स योजते अरुषा उ ५, ३ ४५६ होता यक्षदिन्द्रम् उ ६, १० ५२०