विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)
Harivamsha Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ८ )
९३- नटवेशधारी यादवोंका सुपुर और वज्रपुरमें सफल अभिनय करके दानवोंको रिझाकर उनसे उपहार पाना तथा प्रद्युम्नका प्रभावतीके घरमें प्रवेश ... ५८९
९४- प्रद्युम्न और प्रभावतीका गान्धर्वविवाह एवं समागम, फिर गद और चन्द्रवतीका तथा साम्ब और गुणवतीका गान्धर्वविवाह ... ५९४
९५- प्रद्युम्नका प्रभावतीसे वर्षाका वर्णन करते हुए उसे अपने कुलका परिचय देना ... ५९७
९६- कश्यपके मना करनेपर भी वज्रनाभका त्रिलोक-विजयके लिये प्रस्थान, श्रीकृष्ण और इन्द्रका प्रद्युम्नको संदेश देना और उनकी संततिके प्रभावका उल्लेख करना, दैत्योंका प्रद्युम्न आदिके पुत्रोंको बंदी बनाना, प्रभावती आदि-का पतियोंको तलवार देकर युद्धके लिये भेजना, इन्द्रके द्वारा उनकी सहायता तथा प्रद्युम्नका अद्भुत पराक्रम ... ६०१
९७- प्रद्युम्नद्वारा वज्रनाभका वध तथा प्रद्युम्न आदि-के पुत्रोंका राज्याभिषेक .... ६०६
९८- इन्द्रकी आज्ञासे विश्वकर्माद्वारा पुनः परिस्कृत की गयी द्वारकापुरीका वर्णन ... ६०९
९९- श्रीकृष्णका द्वारका तथा अन्तःपुरमें प्रवेश और मणिपर्वत एवं पारिजातको यथोचित स्थानमें स्थापित करना ... ६१४
१००- श्रीकृष्णका समस्त यादवोंसे मिलकर उन्हें सम्मानित करनेके लिये सभामें बुलाना ... ६१६
१०१- श्रीकृष्णद्वारा यादवोंका सत्कार तथा नारदजीका यादवोंकी सभामें श्रीकृष्णके प्रभावका वर्णन ६१७
१०२- नारदजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णके अद्भुत कर्मोंका वर्णन ... ६२२
१०३- श्रीकृष्णकी संततिका वर्णन तथा वृष्णिवंशका उपसंहार .... ६२५
१०४- प्रद्युम्नका जन्म, शम्बरासुरद्वारा प्रद्युम्नका सूतिकागृहसे अपहरण, प्रद्युम्न-मायावती-संवाद और प्रद्युम्नका शम्बरासुरके सौ पुत्रोंके साथ युद्ध ... ६२७
१०५- प्रद्युम्नद्वारा शम्बरासुरकी सेना और मन्त्रियोंका संहार .... ६३१
१०६- शम्बरासुर और प्रद्युम्नका मायामय युद्ध, शम्बरकी चिन्ता, देवराज इन्द्रकी आज्ञासे नारदजीका प्रद्युम्नको उनके पूर्व स्वरूपका स्मरण दिलाना और आवश्यक कर्तव्य सुझाना ६३६
१०७- प्रद्युम्नके द्वारा शम्बरासुरका वध ... ६४०
१०८- मायावतीसहित प्रद्युम्नका द्वारकामें आगमन और रुक्मिणीके भवनमें प्रवेश ... ६४२
१०९- बलदेवजीके द्वारा प्रद्युम्नको आदित्यस्तोत्रका उपदेश ... ६४५
११०- साम्बकी उत्पत्ति और अस्त्रशिक्षा तथा द्वारकामें पधारे हुए राजाओंके बीच नारदजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी परम धन्यताका प्रतिपादन ६५०
१११- श्रीकृष्णकी महिमा-अर्जुनका श्रीकृष्णसे आज्ञा लेकर ब्राह्मण-बालककी रक्षाके लिये जाना ... ६५६
११२- ब्राह्मणबालककी रक्षा न होनेपर ब्राह्मणद्वारा अर्जुनका तिरस्कार और श्रीकृष्णके साथ उनका उत्तर दिशाको गमन ... ६५७
११३- श्रीकृष्णद्वारा ब्राह्मणपुत्रोंका आनयन ... ६५९
११४- भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने यथार्थ स्वरूपका परिचय देना ... ६६२
११५- भगवान् श्रीकृष्णके पराक्रमोंका संक्षेपसे वर्णन ६६४
११६- भगवान् शङ्करका वाणासुरको अपने और देवी पार्वतीके पुत्रके रूपमें स्वीकार करना, वाणासुर-का उनसे युद्धके लिये वर माँगना और पाना तथा इससे बाण-मन्त्री कुम्भाण्डका चिन्तित होना ... ६६५
११७- शिव-पार्वतीका क्रीडाविहार, पार्वतीका उषाको पति-समागमके लिये वर देना तथा उषाकी विरह-व्यथाका वर्णन ... ६७१