हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 18, कुल 150 में से
संदर्भ में पढ़ेंहिन्द स्वराज्य होता। जो हक, न्याय चाहते हैं, उन्हें सबके साथ न्याय करना होगा। सर विलियम हिन्दुस्तान का बुरा चाहने वाले नहीं हैं, इतना हमारे लिये काफी है। ज्यों-ज्यों हम आगे बढ़ेंगे त्यों-त्यों आप देखेंगे कि अगर हम न्याय की भावना से काम लेंगे, तो हिन्दुस्तान का छुटकारा जल्दी होगा। आप यह भी देखेंगे कि अगर हम तमाम अंग्रेजों से द्वेष करेंगे, तो उससे स्वराज्य दूर ही जाने वाला है, लेकिन अगर उनके साथ भी न्याय करेंगे, तो स्वराज्य के लिए हमें उसकी मदद मिलेगी। पाठक : अभी तो ये सब मुझे फिजूल की बड़ी-बड़ी बातें लगती हैं। अंग्रेजों की मदद मिले और उससे स्वराज्य मिल जाए, मुझे दिखाना तो इतना ही है ये तो आपने दो उलटी बातें कहीं, लेकिन इस कि कांग्रेस ने हिन्द को सवाल का हल अभी मुझे नहीं चाहिए। उसमें स्वराज्य का रस चखाया। समय बिताना बेकार है। स्वराज्य कैसे मिलेगा, इसका जस कोई और लेना यह जब आप बताएँगे तब शायद आपके विचार चाहे तो वह ठीक न होगा मैं समझ सकूँ तो समझ सकूँ। फिलहाल तो और हम भी ऐसा मानें तो अंग्रेजों की मदद की आपकी बात ने मुझे शंका बेक़दर ठहरेंगे। इतना ही नहीं, में डाल दिया है और आपके विचारों के बल्कि जो मक़सद हम ख़िलाफ मुझे भरमा दिया है। इसलिए यह बात हासिल करना चाहते हैं उसमें आप आगे न बढ़ाएँ तो अच्छा हो। मुसीबतें पैदा होंगी। संपादक : मैं अंग्रेजों की बात को बढ़ाना नहीं चाहता। आप शंका में पड़ गये, इसकी कोई फिकर नहीं। मुझे जो महत्त्व की बात कहनी है, उसे पहले से ही बता देना ठीक होगा। आपकी शंका को धीरज से दूर करना मेरा फर्ज है। पाठक : आपकी यह बात मुझे पसन्द आयी। इससे मुझे जो ठीक लगे वह बात कहने की मुझमें हिम्मत आई है। अभी मेरी एक शंका रह गई है। कांग्रेस के आरम्भ से स्वराज्य की नींव पड़ी, यह कैसे कहा जा सकता है ? संपादक : देखिए, कांग्रेस ने अलग-अलग जगहों पर हिन्दुस्तानियों को इकट्ठा करके उनमें ‘हम एक-राष्ट्र हैं’ ऐसा जोश पैदा किया। कांग्रेस पर सरकार की कड़ी नज़र रहती थी। महसूल का हक प्रजा को होना चाहिए, ऐसी माँग कांग्रेस ने हमेशा की है। जैसा स्वराज्य कैनेडा में है वैसा स्वराज्य कांग्रेस ने हमेशा चाहा है। वैसा स्वराज्य मिलेगा या नहीं मिलेगा, वैसा 17