भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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१. नवीन युग "स्वधर्मराज्यवृद्धि करणें ! तुम्हीं सुपुत्र निर्माण झाला" ❀ [ शिवाजी के नाम शाह जी का पत्र ] महाराज शिवा जी का जन्म सन् १६२७ ई० में हुआ । उन के जन्म के कारण ही यह साल एक नये युग का प्रारंभिक काल बन गया । शिवा जी के जन्म से पहिले सैंकड़ों ही वीर आत्माएं, मुसलमान शत्रुओं के आक्रमणों को रोकने के लिए तथा हिन्दू-जाति की मान रक्षा के लिए लड़ते लड़ते अपना बलिदान दे चुकी थीं । अपने देश पर मर मिटने वाले इन योद्धाओं की तरह, शिवा जी बड़ी वीरता से लड़ते हुए विजय- लक्ष्मी को घर लाए । वह विजय पर विजय प्राप्त करने लगे । इस विजय-तरंग ने सारे भारत के हिन्दुओं में नव-जीवन भर दिया । देश में एक अपूर्व शक्ति उत्पन्न हो गई जो क्रमशः बढ़ती २ इस योग्य बन गई कि सैंकड़ों वर्षों तक लगातार शत्रुओं पर विजय पाता रही और हिन्दू- धर्म-ध्वजा उन्नति के उच्चतम शिखर पर लहराती रही । महमूद गज़नवी के आक्रमण से लेकर यवनों की विजय-लहर इतने प्रबल वेग से बही कि उस का कोई मुक़ाबला न कर सका । यह लहर तब तक बढ़ती गई जब तक कि सारा भारत उस में विलीन न हो गया । शिवा जी सर्व प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने विधर्मियों की इस विजय- लहर से अपना सिर ऊपर निकाला और इस लहर को दृढ़ता पूर्वक संबोधित करते हुए कहा--'बस जहां तक तुम्हें चढ़ना था तुम बढ़ चुकी अब और आगे नहीं बढ़ सकती' । शिवा जी के राजनैतिक रंगमंच पर प्रकट होने से पहले--अर्थात् सन् १६२७ से पहले हिमालय से ले कर ❀ मेरे सुपुत्र ! तुम्हारा जन्म अपने धर्म और राज्य की वृद्धि के लिए ही हुआ है ।