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हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

by विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर)

DevanagariHindipublished254 pages

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पर, विचार करने से प्रमाणित हो जाती है जिन्होंने कि यवनों को, जहाँ और जब कभी उन से टक्कर लगी, हरा कर भगा दिया था। हिन्दुओं के राजनैतिक क्षेत्र में सहसा इस महत्वपूर्ण तथा विजयपूर्ण परिवर्तन के दो मूल कारण थे—एक तो यह कि शिवाजी और उनके पूज्यपाद गुरु मद्ज्ञानी रामदास जी जैसी महान् आत्माओं ने हिन्दू- जाति के सामने उन के आध्यात्मिक तथा जातीय उच्च आदर्श को युक्ति पूर्वक रखा, दूसरे उन्होंने नवीन युद्धकला तथा नये २ अस्त्र-शस्त्रों का आविष्कार किया। सचमुच ही मरहठों की यह नवीन युद्धकला युद्ध- विज्ञान में एक नया आविष्कार ही था। उम समय यह हिन्दुओं में बहुत प्रचलित हो गई क्योंकि महाराष्ट्र धर्म एक नवीन शक्ति थी जो कि उस समय हिन्दू जाति की राजनैतिक जीवन की नष्ट होती हुई आत्मा में नवजीवन का संचार कर रही थी।

यह हिन्दू-पद-पादशाही—अर्थात् स्वतन्त्र हिन्दू-साम्राज्य की स्थापना—का उच्च आदर्श ही था जिस ने कि हिन्दू स्वतन्त्रता के लिए लड़ने वाले नेताओं को दृढ़ विश्वास के साथ उभारा और उन में अपार शक्ति भर दी। साथ ही मरहठों ने युद्ध के नये और विस्मयजनक ढंग— गुरेला युद्ध कला—से मुसलमानों को दंग कर दिया। इस नवीन युद्ध- कला के सामने यवन न ठहर सके। इस प्रकार उन्होंने मुसलमानों पर अपनी वीरता से विजय प्राप्त करके हिन्दू जाति के मस्तक को पुनः विजय तिलक से सुशोभित कर दिया।

इतना ही नहीं, आगे चल कर हम देखेंगे कि उन के इस उच्च ध्येय ने मरहठों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रयत्नशील बनाया, उन्हें प्रोत्साहित किया, उनकी बिखरी हुई शक्तियों को एकत्रित किया, उन का उद्देश्य एक बनाया तथा उनके हित भी मुशतरका बना दिये, जिस से वे अनुभव करने लगे कि उन लोगों का मनोरथ न तो व्यक्तिगत है और न केवल प्रांतीय, वरन् यह एक धार्मिक तथा सार्वदेशिक कार्य है, जो साधु से लेकर

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