भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

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[ ७ ] के रूप में खड़े रहने के अधिकार का प्रमाण दिया । उन्होंने विजेता पर विजय पाई—और तब वह समय था जब यदि मुगल चाहता तो देशवासी और मित्र के नाते उसे गले लगाया जा सकता था । इस दृष्टिकोण से देखा जाय तो मरहठों का इतिहास, हिन्दू-मुस्लिम एकता की राह में बाधक होने के स्थान पर चिरस्थायी-एकता के मार्ग का निर्देश करता है जो कि इससे पहले दुर्गम था । इसलिये भार- तीय इतिहास का यह स्वर्णिम समुल्लास सभी भारतीय देशभक्तों— हिन्दुओं और मुसलमानों—के विशेष रूप से अध्ययन करने के योग्य है। साधारण पाठकों के लिए भी स्वातन्त्र्य-संग्राम में उलझे हुए राष्ट्र की यह गौरव-गाथा कुछ कम दिलचस्प न होगी जिसमें सुभट योद्धाओं, दूरदर्शी राजनीतिज्ञों, साम्राज्य-निर्माताओं, सन्तों और कवियों— शिवा जी और बाजीराओ, भाऊ साहब और जनको जी, नानाजी और महादजी सन्त रामदास और मोरोपन्त-ने—भाग लिया । शिरगांव —सावरकर १५ फरवरी १६२५