इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 180, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंदौत
जब बच्चे के दौत निकलने आरम्भ होते हैं उस समय उस को इतना कष्ट होता है कि वह लिखा नहीं जा सकता। बच्चा उस समय तक बोलता नहीं इसी कारण वह अपने कष्ट को नहीं कह सकता। जिसके कारण बच्चों को ज्वर, दस्त, नेत्र रोग आदि अनेक व्याधियाँ लग जाती हैं। ऐसी अवस्था में बच्चे की विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
सिरस के बीजों को पानी में भिगो दें जब बीज फूल जायें तो उन्हें सुई द्वारा एक डोरे में पोकर माला बना लें। यह माला बच्चे के गले में कण्ठ से लगी हुई पहिनने से दौत सुगमता से निकल आते हैं या एक लाकेट ताँबे का बनवाकर उसके बीचों बीच में आर-पार एक छिद्र कराकर उसमें जस्ता और चाँदी की मिश्रित कौल लगाकर उस पर बिजली चढ़ा लें। यह लाकेट भी बच्चों के दौत सुगमता से निकलने में साधक है। बच्चे के मसूड़ों पर शहद में सहागे की खोल मिलाकर मलना उपयुक्त है।
नेत्र
गिरती हुई नेत्र ज्योति- यह आश्चर्य की बात है कि वर्तमान पीढ़ी की आँखों की ज्योति गिरती जा रही है। इससे भी अधिक आश्चर्य जनक तथ्य यह है कि इसका कारण स्पष्ट करने वाला कोई वैज्ञानिक सिद्धान्त विद्यमान नहीं है। यद्यपि इसका कारण वंश परम्परा, पौष्टिक पदार्थों की कमी, जीवन का आधुनिक सभ्य ढंग, स्वास्थ्य की दुर्बलता बताये जाते हैं। फिर भी वास्तविक कारण अभी भी कल्पना का विषय बना हुआ है।
इच्छानुसार सन्तान
१७४
वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri