भारतकोश
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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प्रातःकाल

उठो देव गण! जागो, सुन्दर प्रभात-वेला आई। निशा-देवी गृह को चली, उषा अरुणिमा नभ छाई॥ नव जीवन की आभा फैली, हुआ प्रकृति का नव श्रृंगार। दिव्य ज्योति का उदय हुआ, फिर चमक उठा सारा संसार॥

देखो कितना सुन्दर और सुहावना समय है। इस समय को अमृतवेला कहा जाता है। इस समय प्रकृति कितनी शान्त और सुहावनी होती है। इस शान्ति और सुहावनेपन को यदि हम अपने हृदय में पान कर लें तो अमृतमय हो सकते हैं। यह तो है ही कि इस सुन्दर अमृतवेला में जो संस्कार हम अपने में डालेंगे, वे हमारे अन्दर अमर हो सकते हैं, स्थायी हो सकते हैं।

ब्राह्मो मुहूर्त उत्तिष्ठे ज्जीर्णाजीर्ण।

निरुपयन् रक्षार्थ मायुषः स्वस्थ्योः॥

अर्थ- रात्रि के अन्त और सूर्योदय के एक घण्टा पूर्व समय को ब्राह्ममुहूर्त कहते हैं। जिस समय मूर्गा बींग (ध्वनि) देता है वही उठने का समय है मूर्गा प्राकृतिक बिगुल, भौंपु, घड़ी का एलार्म है जो ब्राह्ममुहूर्त के समय बोलता है। उसी समय उठकर अंग के जीर्ण-अजीर्ण का ज्ञान करना चाहिए और अजीर्ण मालूम पड़े तो न उठना चाहिए, और धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ा लेना चाहिए। अभ्यास से कष्ट नहीं होता। निद्रा त्यागते (चारपाई से उठते) ही पारब्रह्म परमेश्वर का ध्यान करके शय्या से उठो। प्रातः काल वेद मंत्रों का उत्तम रीति से सानन्द पाठ व उच्चारण करने से आत्मा उत्साहित होकर मानसिक दुर्भाव रूपी शत्रुओं का नाश होता है।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri