इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 44, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंअर्थ- आठ चुल्हू जल प्रातःकाल पीने से अर्श, शोथ, संग्रहणी, उदर रोग, बुढ़ापा, कूष्ठ, मेदरोग मूत्रधात, रक्तपित्त, कान रोग, सिर शूल, नेत्ररोग, वात, पित्त, कफ, रक्त से उत्पन्न होने वाले रोग नष्ट होकर सौ वर्ष की आयु सुखपूर्वक व्यतीत होती है।
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मल मूत्र त्याग
मूत्रोच्चारसमुत्सर्गं दिवा कुर्यादुदक्ष मुखः।
दक्षिणाभिमुखो रात्रौसन्ध्ययोश्चयथा दिवा॥
मनु४/५०
अर्थ- दिन और दोनों संध्याओं में उत्तर दिशा की ओर मुख करके और रात्रि को दक्षिण दिशा को मुख करके, मल, मूत्र त्याग किया करें।
मूत्रं नोत्तिष्ठिता कार्यम्।
अर्थ- (महाभारत अनुशासन पर्व १०४) खड़े होकर पेशाब नहीं करना चाहिये, यह अमंगलकारी और अलक्ष्मी दायक है। कालान्तर में पक्षाघात, हृदय रोग, आंत का उत्तरना, राशा जैसे भयंकर रोगों का हो जाना सम्भव है।
प्रत्यग्निं प्रतिसूर्यं च प्रतिसोमोदकद्विजान्।
प्रतिगां प्रतिवातं च प्रशा नश्यति मेहतः॥
मनु४/५२
अर्थ- अग्नि, सूर्य, चन्द्र, जल ब्राह्मण, गौ और वायु इनके सम्मुख मूत्र करने वाले की बुद्धि नष्ट होती है।
मल-मूत्र त्यागते समय उपरोक्त बातों का ध्यान रखना और उस समय बातें न करना किसी भी कार्य को न सोचना, परन्तु यह ध्यान करना उचित है कि मल का विसर्जन ठीक प्रकार हो रहा है और पेट शुद्ध हो गया। सबसे बढ़कर मनुष्य शरीर को हानि
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्ता
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