भारतकोश
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

Devanagarihipublished250 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 250 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 48

अध्ययन

शरीर में तेल मर्दन करने से शरीर पुष्ट होकर हल्का स्फूर्तिदायक और सुन्दर हो जाता है। जिस प्रकार मशीन में तेल देने से मशीन हल्की और सुगमता से चलने लगती है उसी प्रकार शरीर भी तेल मर्दन से स्फूर्तिदायक होकर सुगमता से कार्य करने लगता है। जाड़ों में तीसरे दिन और गर्मियों में दसवें दिन तेल मर्दन करना चाहिए।

★★★

व्यायाम

व्यायाम क्षुण्ण गात्रस्य आयुस्तेजो यशोबलम्।

प्रवर्धनो मनुष्यस्य तस्माद् व्यायाममाचरेत्॥

अर्थ- व्यायाम करने से जिसका शरीर पुष्ट हो गया है, उस मनुष्य की आयु तेज कीर्ति और बल में वृद्धि हो जाती है, इसलिए मनुष्य को व्यायाम करना चाहिए।

जिस प्रकार प्रयोग में न आने वाली मशीन को जंग लग जाती है और पुनः चलाने पर अपना कार्य पूरा नहीं कर पाती इसी प्रकार मनुष्य शरीर है। इसमें भी जिस अंग से कार्य नहीं लिया जायगा तो वह अंग शिथिल पड़ जायेगा। व्यायाम द्वारा प्रत्येक अंग पुष्ट होकर निरोगता पाकर अपने काम को सुचारू रूप से कर सकते हैं समर्थ होंगे।

★★★

इच्छानुसार सन्तान

४४

वीरेंद्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri