इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 50, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्पन्न करता है। कम से कम सप्ताह में एक बार सारे शरीर को कच्चा दूध मलकर स्नान करना उत्तम है। दूध से शरीर का मैल साफ होकर शरीर पुष्ट और सुन्दर होता है। कहावत है—'दूध नहाओ पूतन फलो' इससे प्रतीत होता है पहले हमारे पूर्वज दूध से स्नान करने वाले को उतना ही भाग्यशाली मानते थे जितना उत्तम गुणवान पुत्र के प्राप्त करने वाले को।
★★★
संध्या वन्दन
मनुष्य जीवन को यशस्वी, परक्रीम, ख्यातिमान बनाने वाला उपाय है तो वह ईश्वर स्मरण ही है। हमारा इतिहास इस बात का साक्षी है कि जितने भी पराक्रमी, बुद्धिमान, तेजस्वी पुरुष एवं देवियों हुई हैं वे सब एक मात्र तप के ही बल से हुए हैं। हम ईश्वर का स्मरण करते हैं, जिसके प्रभाव से हमारी बुद्धि शुभ बनती है इससे हम सम्पूर्ण पर चल कर सानन्द निर्विघ्न अपनी जीवन यात्रा समाप्त करते हैं। हमारी सबसे बड़ी यह इच्छा रहती है कि हे ईश्वर हमें सदबुद्धि दो, बिना सदबुद्धि के हम अनेक दुःखों में पड़कर कष्ट भोगते हैं। गृहस्थ जीवन में, अनेक कार्य ऐसे हो जाते हैं जिन को द्वारा गृहस्थी हिंसा के पाप से बच नहीं पाता। जैसे भोजन तैयार करने में लकड़ी के साथ घुन या अन्य जन्तुओं का जल जाना, बहारी (झाड़ू), लगाते समय चीटियों आदि का मर जाना आदि अनेक ऐसे कर्म हैं। इन्हीं पाप कर्मों का प्रायश्चित्त करने के लिए हमारे ऋषियों ने पंच महायज्ञ के नाम से नित्य कर्म में पाँच यज्ञों को करना बतलाया है।
पञ्च सूना गृहस्थस्थ चुल्ही पेचरायुपस्करः।
कराठनी चोदकुम्भश्च वध्यते यास्तु वाहयन्॥
मनु ३/६८
इच्छानुसार सन्तान
४६
वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri