जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[ २४ ]
विषय पृष्ठ २४२. सुनख जातक . . . ४३५ [ कुत्ते को चमडे की रस्सी मे बाँधकर ले जाया जा रहा था । जब सब लोग सो रहे थे कुत्ते ने चमडे की रस्सी काट डाली और भाग आया । ] २४३. गुत्तिल जातक ४३८ [ उज्जैन का मूषिल गन्धर्व काशी के गुत्तिल गन्धर्व के पास आया । उसने गुत्तिल से वीणावादन सीख गुत्तिल से ही मुकाबला करने की धृष्टता की । ] २४४. थोतिच्छ जातक . ४४७ [ परिव्राजक ने बोधिसत्त्व से शास्त्रार्थ किया—कौन सी गङ्गा ? ] २४५. मूलपरियाय जातक . ४४६ [ आचार्य ने अभिमानी शिष्यो को प्रश्न पूछ कर निरुत्तर किया । ] २४६. तेलोवाद जातक ४५२ [ बुद्धिमान मास खाने वाले को पाप नहीं लगता । ] २४७. पादञ्जली जातक . ४५४ [ पादञ्जली कुमार को केवल होंठ चबाना आता है । ] २४८. किंसुकोपम जातक ४५६ [ राजकुमारो ने किंसुक को भिन्न भिन्न समयो म देखा था । इसीलिए उनमें से एक ने किंसुक को एक आकार का समझा, दूसरे ने दूसरे का । ] २४६. सालक जातक . . . . ४५८ [ सपेरे ने बन्दर को बाँस से मारा । बंदर ने फिर सपेरे का विश्वास ही नही किया । ] २५०. कपि जातक . . . ४६१ [ ढोंगी बन्दर आग तापने के लिए कुटी के द्वार पर बैठा था । तपस्वी ने भगा दिया । ]