भारतकोश
जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

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[ ८ ] विषय पृष्ठ १२४. अम्ब जातक .. ५५ [ तपस्वी अपने आहार की भी चिन्ता न कर पशुओ को पानी पिलाता था । वे उसे फलमूल लाकर देने लगे । ] १२५ कटाहक जातक ५८ [ दास ने झूठा पत्र लिख एक सेठ की लडकी से शादी की । स्वामी को पता लग गया । लेकिन तब भी उसने प्रकट न किया । दास सेठ की लडकी को तग करता था-भोजन में बहुत दोष निकालता था । स्वामी ने सेठ की लडकी को एक ऐसा मन्त्र बता दिया कि दास का मुंह बन्द हो गया । ] १२६ असिलक्खण जातक ६२ [ एक ब्राह्मण तलवार को सूंघ कर अच्छी या बुरी बताता था । रिश्वत देनेवाले की तलवार अच्छी, न ' देनेवाले की बुरी ठहरती । किसी शिल्पी ने तलवार के म्यान मे मिर्चचूर्ण भर अपनी तलवार परीक्षा के लिए दी । ब्राह्मण को तलवार सूंघते समय छींक आ गई । नाक कट गई । पीछे लाख की नाक लगवाई गई । एक राजकुमार और राजकुमारी परस्पर स्नेह करते थे । लोग उनका विवाह न होने देना चाहते थे । राज- कुमार ने भूत बन छींक कर राजकुमारी को प्राप्त किया । छींकने से एक की नाक कटी, दूसरे को राजकुमारी मिली । ] १२७ कलण्डुक जातक ६६ [ कटाहक जातक (१२५) के समान है। इस जातक म सेठ की जगह एक तोते का बच्चा दास को सावधान करता है । ]