भारतकोश
जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

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दुब्बच ] २६ ११६. दुब्बच जातक “अतिक्करमकराचरिय” यह गाथा शास्ता ने जेतवन में विहार करते समय एक बात न माननेवाले भिक्षु के बारे में कही। क. वर्तमान कथा यह कथा नवें निपात में गिज्झ जातक¹ में आयेगी। शास्ता ने उस भिक्षु को बुला, ‘भिक्षु, तू केवल अभी बात न माननेवाला नहीं है, बल्कि पहले भी तूने पण्डितों का कहना न करके शक्ति के आघात से जान गँवाई’ वह, पूर्व- जन्म की कथा कही— ख. अतीत कथा पूर्व समय में वाराणसी में ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय बोधिसत्त्व ने लङ्घन² के घर में जन्म लिया। बड़े होने पर वह बुद्धिमान तथा व्यवहार- कुशल हुआ। वह एक नट से शक्ति लाँघने की कला सीखकर आचार्य के साथ हुनर दिखाते हुए घूमता था। बोधिसत्त्व का उस्ताद चार ही शक्तियों के लाँघने का हुनर जानता था, पाँच के लाँघने का नहीं। एक दिन उसने एक गामड़े में तमाशा दिखाते समय शराब के नशे में मस्त होकर, ‘पाँच शक्तियों को लाँघूँगा’ कह उन्हें क्रम से रखा। बोधिसत्त्व ने कहा— आचार्य, आप पाँच शक्तियों को लाँघने का हुनर नहीं जानते; इसलिए एक शक्ति को हटा दें। यदि पाँचों को लाँघेंगे तो पाँचवीं शक्ति से बिंधकर मरेंगे। ———————— ¹ गिज्झ जातक—नवें निपात की पहली जातक। ² लङ्घनट=बाजीगर।