भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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ग्रन्थ-परिचय ज्योतिष के दो भाग हैं गणित एवं फलित । गणित को सिद्धान्त कहते हैं और जिसमें जातक के फलादेश वर्णित हैं उसे फलित ज्योतिष कहते हैं । मानव मन सामूहिक फल जानने में जितनी रुचि नहीं रखता उससे कहीं अधिक वह अपने व्यक्तिगत जीवन के शुभाशुभ भविष्य फल जानने की उत्कृष्ट अभिलाषा रखता है । प्रस्तुत जातकपारिजात १८ अध्याय का विशालकाय ग्रन्थ है । अध्यायों में विषय-संयोजन निम्न प्रकार से है-१. राशिशीलाध्याय, २. ग्रहनामस्वरूप- गुण भेद, ३. वियोनि (पशु-पक्षी आदि) जन्म का निरूपण, ४. अरिष्टाध्याय, ५. ग्रहों की निसर्ग आयु (आयुर्दाय), ६. जातकभङ्ग (शुभ योग नाशक योग ), ७. राजयोग, ८. द्वयादि- ग्रह ( दो-दो ग्रहों ) का योग, ९. मन्वाब्दादि- फल ( मन्दबुद्धि आदि फल ), १०. अष्टक वर्ग ( सूर्यादि ग्रहों के वर्ग ) ११. प्रथम द्वितीय भाव फल, १२. तृतीय चतुर्थ भाव फल, १३. पञ्चम षष्ठ भाव फल, १४. सप्तमाष्टम नवम भावफल, १५. दशमैकादशद्वादश भाव फल, १६. स्त्रीजातक ( स्त्रियों के देह का शुभाशुभ फल आदि ); १७. कालचक्रदशा, १८. दशा- फल ( दशापतग्रहों के शुभाशुभ फल ) । संस्कृतानुरागियों के लिए संस्कृत व्याख्या बड़ी सरल सुबोध शैली में है और हिन्दी व्याख्या से इसके कठिन रहस्य भाव को विद्वान व्याख्याकार ने सुगमतापूर्वक समझाने का प्रयास किया है । स्थान-स्थान पर चक्र, कोष्ठक, कुण्डलीय और तालिका देकर ग्रन्थ को सर्वोपयोगी बनाया गया। फलित ज्योतिष के क्षेत्र में यह प्रकाशन एक नवीन अध्याय जोड़ता है तथा फलित ज्योतिष विद्या में रुचि रखने वाले अन्य सर्वसामान्य जनों के लिए भी यह ग्रंथ अति संग्रह्य है । मूल्य रु० ७५-००