भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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गीन ! तूने जो हरिनीके बच्चेपर दया की उसके पलटेमें तुझको गजनीकी बादशाहत मिली । चाहिये कि, इसी प्रकार सब जीवधारियोंपर दया करता रहे इसके पश्चात् थोड़ेही दिनोंमें सुबुकुतगीन गजनीका बादशाह होगा ।

महापाप — मुसल्मान कहते हैं कि, हम अपना जबह किया हुआ हलाल समझते हैं, यह उनका कहना एकदम झूठ है । मुर्दा मछलीको किसने जबह किया । मुर्गी बतखके अण्डे आदिकके खानेके लिये कौनसा कलमा उतरा । अपने मारीको हलाल खुदाकी मारीको हराम कहना काफिरका काम है, जीवितको मार डालना महापाप है, जबहकी उसके जीवित करनेकी शक्ति नहीं रखते ।

कुत्तेके बचानेका महापुण्य — किताब दोस्तोंके दूसरे बाबमें यह कहानी लिखी है कि, एक भला आदमी जङ्गलमें चला जाता था. उसने एक कुत्तेको देखा कि, प्यासका मारा मर रहा है । उसने अपने शरसे टोपी लेकर पगड़ीमें बांध पानी भरा कुत्तेको पिलाया, कुत्तेके प्राण बच गये इस पुण्यके प्रतापसे उस समयके पैगम्बरको आकाशवाणी हुई कि, उस पुरुषको इतना पुण्य हुआ है कि, उसका सब पाप नष्ट हो गया । ध्यान देने योग्य बात है, जब एक जीवके बचानेसे इतना पुण्य हुआ तो जान मारनेसे कितना भारी पाप होता होगा ।

यथा-भिहिशती दर्दमन्दा हैं बुजुर्ग । नहीं इन्साँ बा आदते गुर्ग ।।

वही आदम वही हैवान हशरात । वही है और नहीं कुछ दूसरी बात ।।

मुंसी मिश्रका सच्चा सिद्धान्त — मुंसी मिश्र नामका एक बड़ा पण्डित बनारसमें आया । उसने मछलीको अपनी ध्वजामें बांधकर खड़ा कर दिया विज्ञापन दे दिया कि, यदि कोई पण्डित वेदशास्त्रके अनुसार मांस आहारको निषेध ठहरा दे तो मैं उसका सेवक बन जाऊँ । बनारसके सब पण्डितोंने बहुत युक्तियाँ की पर वह परास्त नहीं हुआ । एक दिन पण्डित लोग विचार करके ठीक उसी समय जब कि, गङ्गामें स्नान कर रहा था, उसके पास गये । जाकर कहा कि, महाराज ! इस समय आप गङ्गामें खड़े हैं सत्य कहिये मांस खाना उचित है कि, अनुचित ? मिश्रने कहा कि, जब आप लोग वेदशास्त्रके आधारसे परास्त न कर सकते तो धर्मबद्ध करके परास्त करने आये हैं, अब मैं सत्य कहता हूँ कि, मांस खाना बड़ा भारी पाप है, इतना कह उसी समय पण्डितने मांस त्याग दिया कण्ठी बांधकर बैष्णव हो गया ।

घृणित दुर्गन्धि — मांस आहारी मनुष्य और पशुके शरीरसे ऐसी दुर्गन्धि निकलती है जिससे महाघृणा होती है ।

महात्मा और राजा — एक राजा आखेटको गया, बहुतसी शिकार मारकर