भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1033

तक माया और मायिकोंमें फँसा रहता है, तब तक अद्वितीयसत्यपुरुषकी उपासनाके योग्य नहीं होता । क्योंकि, दोनोंमें ही भेद वाद है । दोनोंका उपदेश भेद ही है, भेदसे भिन्न उनका उपदेश कदापि नहीं हो सकता चारों वेदोंने स्वरूप प्रगट किया, तो प्रथम भारत वासियोंको प्राप्त हुये, लोगोंने उनकी आज्ञापार चलना आरम्भ किया । यद्यपि कतिपय धर्मोंके लोग आजकल उसके विरुद्ध भी चल रहे हैं ।

वेदके टीकाकारोंने, ऊँकारके यथार्थ आशय और अर्थको न समझा, इसका कारण केवल उनके ज्ञानकी अपूर्णता है । वेद तो किसीसे स्वयं कुछ नहीं कहते न बोलतेही हैं, जिससे कि अपने उपदेशको प्रगट कर सकें लोगोंको शिक्षा दें तथा कहें कि, तुम अमुक वेद मन्त्रकी व्याख्या इस प्रकार करो इस प्रकार न करो । इसी कारण सब टीकाकारोंने अपनी २ बुद्धि और पहुँचके अनुसार जैसा चाहा टीका करदी उन्होंने यह कुछ भी न सोचा कि, मेरा विचार सत्य अथवा असत्य । इस कारण वेदके आशयको वही समझ सकते हैं, जिनका अन्तःकरण ज्ञानके यथार्थ प्रकाशसे पूर्ण है । दूसरे नहीं ।

इस ऊँकार की यथार्थताको न जाननेके कारण ही वेदपाठी लोग आवागमनमें फँसे रहते हैं । अद्वैतमें कुछ विकार नहीं, द्वैतमें है । अद्वैतमें वेद वाणी कुछ नहीं । जितने वेदपाठी हैं अपनी बुद्धिपर भरोसा रखते हैं, जिस बुद्धिपर भरोसा रखते हैं उस बुद्धि की पहुँच अद्वैत तक है ही नहीं, फिर वेदपाठियोंको क्या सहारा रहा, वे असहाय हैं । जो अद्वैतके खोजा हैं वे द्वैतमें कदापि वृत्ती नहीं लगाते । जो अनेकमें मन लगाते हैं वे एककी प्राप्ति नहीं कर सकते । आशा तृष्णा द्वैतमें है, अद्वैतमें पग धरते ही सांसारिक विचार और सङ्कल्प छोड़ने पड़ेंगे । जब तक सांसारिक ध्यान है तब तक माया है, कोई उपाय क्यों न करे छुटकारा नहीं हो सकता ।

तौरेतकी आज्ञाएं ।

१-एक खुदाकी पूजा करो, २-बुतपरस्ती मत करो, ३- खुदाका नाम बे फ़ाइदा मत ला, ४-सबतका दिन पाक रखो, ५-माता पिताकी प्रतिष्ठा करो, ६-खून मत करो, ७-व्यभिचार मत करो, ८-चोरी मत करो, ९-अपने पड़ोसीको प्यार करो, १०-झूठ गवाही मत दो । ये दश आज्ञायें तौरेतके सार हैं । प्रगट तो इनका अर्थ सब कोई समझ लेता है, परन्तु यथार्थमें इनका अर्थ इस प्रकार समझना चाहिये ।

१-एक खुदा (ईश्वर) की पूजा-करो—कहनेवालेका आशय तो यह