भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बुतोंपर मुझे बड़ाई है, मेरी आज्ञामें सब बुत हैं । अतः खुदाने खूरूजमें मूससे कहा कि, मैं मिसरकी सब बुतोंको दण्ड दूंगा, यदि वे पत्थरकीही होतीं तो दण्ड किसको देता गन्दी वासनासे शरीरधारीकी पूजा करना मनुष्योंका काम नहीं बरन् जो लोग आत्मज्ञानसे खाली हैं वे बुत परिश्ती करते हैं । बुतपरस्तोंमें आठ प्रकारकी बुतपरिस्ती है, १—मिट्टीकी, २—कागदकी, ३—धातुकी, ४—पत्थरकी और ५—ध्यानकी छबि अर्थात् जैसा मन चाहे वैसी, ६—प्रत्यक्ष अर्थात् देहवान् मनुष्यकी पूजा, ७—प्रत्यक्षका ध्यानमें पूजना, ८—उसको अपने दिलके भीतर पूजना । ये आठ प्रकारकी बुतपरिस्ती है । प्रत्यक्ष बुतकी पूजा सब बनी इसराईल करते आये हैं । सुलेमानने जीवित और मृतक दोनोंकी पूजा की थी । उपासनाके लिये भगवानकी मूर्ति पूजा बुतपरिस्ती नहीं है ।

३ खुदाका नाम बेफायदा मत लो—जो खुदाको जानतेही नहीं वे उसका नाम क्योंकर ले सकते हैं ? खुदाका नाम तो खुदाको पहचाननेवाले जानते हैं । बिना ईश्वरी उपदेशके ज्ञानवालोंके ईश्वरका नाम लेना निरर्थक है । ईश्वरने जिसको नाम बतलाया, वह अवश्य उसका नाम जानता होगा क्योंकि ईश्वरसे प्रथम दूसराही कोई नहीं था सबसे पहले वही एक अद्वितीय था । जबतक पूरे सत्यगुरुकी शिक्षा न मिले, तबतक उस अद्वैत शुद्ध चैतन्यका नाम क्यों कर जान सकता है ?

सत्य कबीर वचन

जो निगुरा सुमिरण करे, दिनमें सौ सौ बार ।

नगर नायका सत्य करे, जरे कौनकी लार ॥

जो कोई गुरुमुख हो उसीका नाम लेना ठीक है, जिसके गुरुही नहीं वह नाम क्या ले ? इस संसारमें जितने नाम प्रसिद्ध हैं सब मायाके हैं, कोई भी ईश्वर का नहीं । ईश्वरका नाम सच्चे सन्तोंके अन्तःकरणमें है, वो योग्य और बुद्धिमान् अधिकारीको बतलाते हैं सच्चे सन्तकी सच्चे मनसे सेवा करने पर सन्त और साहबकी कृपा दृष्टि होती है नाम मिलता है । वर्तमानकालमें कोई गुरुको खोजताही नहीं । किसीसे कोई नाम पूछ लिया, अथवा सुन लिया, वही नाम लेकर दिन रात माला फेरा करता है । उसका नाम लेना निरर्थक है, कोई गुरु है न चेला, कोई आज्ञाकारी है न सेवक । मूस तो कलके समान गतिमान किया गया था कि, बनी इसराईलको उपदेश करे । जो विधि निषेध उसके खुदाकी ओरसे मिला वही दूसरोंको समझाता रहा । मूस स्वतन्त्र नहीं था, दूसरोंकी आज्ञासे काम करता था । अपने खुदाकी आज्ञाकारितामें मूसको किसी प्रकार