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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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इन पढ़े हुएोंमें वेदपाठियोंकी प्रथम श्रेणी है। वे लोग वैदिक कोष आदिकोंसे अपने मनमाने अर्थ ठहराते हैं। यद्यपि उनका निश्चय झूठ भी हो तो भी उसीको सिद्ध करनेके लिये बहुत प्रयत्न करते हैं। वे अपनी विद्वत्ता दिखलाकर संकड़ोंको अपना अनुयायी बना लेते हैं। उनमेंसे किसीको भी सत्य असत्यका ज्ञान नहीं होता।

वर्णमालापर विचार।

पहले ऐसे लोगोंको चाहिये कि, वर्णमालाके अक्षरोंका अर्थ समझ लें। संस्कृतकी वर्णमालामें सोलह स्वर हैं इनके बाद व्यञ्जन हैं। सोलहों स्वरोंमें बारहसे सब काम चल जाता है। शेष चार व्याकरणके काममें आते हैं। इन सोलहोंमें भी तीन वर्ण मुख्य अ, इ, उ हैं। इन्हीं तीनों स्वरोंसे सब स्वर बने हैं। वे ये हैं—अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ, लृ, ॠ, ए, ऐ, ओ औ, अं, अः। येही संस्कृतके सोलह स्वर हैं। इनमें पहला (अ) है—यही सबसे पहिले है इसका अर्थ क्या है?

यह अकार पहले अकेला था, उसके साथ एक दूसरा अ मिल गया, तब ऊँचे स्वरसे उच्चारण किया गया—आ कहलाया। प्रथम जब यह अकेला था तब इसका उच्चारण हलका था। उसके साथ दूसरा मिला तो भारी शब्द हो गया, जब अकेला था तब एक था कि, अनन्त था? यदि एक कहा जायगा तो अद्वैतमें कुछ लिखना कहना आदि नहीं हो सकता। यदि अनन्त कहा जायगा तो उसके साथ साथ क्या था? पहले यह क्या था? दूसरा इसके साथ कौन मिला है। इसके साथ दूसरा मिलानेपर गतिकी शक्ति हुई नानारूप बनने लगे। पहले यह—अ और दूसरा कहोंसे आकर उसके साथ मिला, किस लिये उनके साथ मिला? अकारके पीछे—इ जब अकेला था तब कुछ नहीं कर सकता था। उसके साथ दूसरा आन मिला तो स्वयं गतिमान हुआ, एकसे अनंतकी ओर बढ़ा उसका रूप ई के समान हुआ, ये दोनों मिलकर क्या हुये? इनके पीछे तीसरा प्रगट हुआ—उ—यह क्या हुआ किस वास्ते हुआ? अकेला था तब कुछ न कर सकता था, जब दूसरा उसके साथ सम्मिलित हुआ तब उसका स्वरूप—ऊ—हुआ यह क्या हुआ किस वास्ते हुआ। इस प्रकारसे यह तीनों अक्षर गुप्तसे प्रगट हुये दो दो मिलकर अनेक हो गये, ये सारे संसारमें फैल गये। इसी वर्णमालासे सारे संसारभर की वर्णमाला हुयी।

स्वर क्या है और व्यञ्जन क्या है? वेद पाठियोंको उचित है कि, प्रथम इन तीनों अक्षरोंके आशयको भली प्रकार समझ लें कि ये तीनों क्या चीज हैं। स्वर क्या है और व्यञ्जन क्या है? वेद पाठियोंको उचित है कि, प्रथम