भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1133

क्या जाने जाहिल वह साहिल सो कहाँ है ॥
क्या इल्मो अमल आमिल कामिल होवे लाशा ।
कर बन्दगी बे आजकी तब देख तमाशा ॥

जगत्को असत् प्रतिपादन

यह जगत् असत् है । यद्यपि यह सत् होकर भासता है तथापि मृगतृष्णाके जलके समान असत् है । असत्के ग्राहकोंको सत्य पदार्थ नहीं मिल सकता, सांसारिक पदार्थोंके अभिलाषी संसारमें ही रहेंगे । जिन लोगोंने संसार तुच्छ समझ लिया है उनका संसारसे प्रेम नहीं होता । यह संसार उसी मृगतृष्णाके जलके समान है, जो हिरणको दौड़ाकर मार डालता है । गर्मीके दिनोंमें जब हिरण प्यासा होता है, जलके लिये इधर उधर भटकने लगता है तो उस समय उजाड़ मैदानमें उसे दूरसे जल दीख पड़ता है । मृग, जल जानकर उसकी ओर दौड़ता है पर उसके निकट पहुँचते पहुँचते वह जल फिर उसको उतनीही दूर आगे दीख पड़ता है । इसी प्रकार अनेक बार दौड़ते दौड़ते हिरण थककर गिर पड़ता है, प्राण त्याग देता है । इस प्रकार इस संसारके भोग विलास त्रिविध तपोंसे तपे हुये, सुखके प्यासे जीवोंको, सुखदाई दीख पड़ते हैं पर इसकी प्रवृत्ति विषयोंमें होती है तो सुख मिलता नहीं—पर तृष्णा अधिकसे अधिक होती जाती है, अन्तमें निष्फलताके साथ मर कर आवागमनको प्राप्त होता है ।

सांसारिक वासनाके बद्ध पुरुष बारम्बार संसारी पदार्थोंकी इच्छा करके उसीमें फँसे रहते हैं, उसीके लिये प्रयत्न करते हैं, उसीके प्राप्त होनेसे आनन्द समझते हैं । ऐसे पुरुषोंका अंतःकरण मलीन रहता है, वे ईश्वरको प्राप्त नहीं हो सकते । क्योंकि, ईश्वरको प्राप्त होनेके लिये उनको प्रयत्न करनेका समयही नहीं मिलता । ऐसे लोग अपनी आयुको सांसारिक व्यवहारोंमें व्यतीत कर देते हैं । जो लोग सत्संग करते हैं उनको संसार बाजीगरके खेलके समान जान पड़ता है । जिस प्रकार बाजीगर नाना प्रकारके कौतुक दिखलाता है, कभी बाटिका लगा देता है, कभी उसे अन्तर्धान कर देता है । कभी किसीको मृतक करके जीवित कर देता है, कभी कुछ कभी कुछ आश्चर्ययुक्त कार्य कर दिखाता है पर उसकी सब जादूगरी मिथ्या होती है, उसी प्रकार इस संसारके सारे कार्य आश्चर्यमय हैं । उस सर्व शक्तिमान् बाजीगर (जगत्कर्त्ता) ने इस संसारकी रचना की है । जिस प्रकार बाजीगर कौतुक करता करता तमाशेको समेट लेता है उसी प्रकार ईश्वर जगत्का प्रलय कालमें प्रलय कर देता है । अज्ञानी जन इस कौतुकको देखकर आश्चर्य मानते हैं, पर जो पुरुष बाजीगरके कौतुकका