कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1145, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंहुई है । हुजूरशाहजीने धूलीशाहके कब्रको जाकर देखा सलाम करके चले आये । इसी प्रकार सहलों साधू फकीर प्रगटमें तो मर गये हैं पर दूसरी जगह फिर प्रगट होकर फिरा करते हैं । यह सारा संसार बाजीगरका कौतुक है । उदाहरण लिखता हूँ ।
एक दिन ये ही हुजूरशाह साहब कहने लगे कि, गरमीका समय था । कड़ाकेकी धूप पड़ रही थी, दोपहर होने आया था, उस समय एक अघोरी मेरे पास आया । अभ्यागतोंको सम्मान देना सबको उचित है पर उस समय पास खानेका पदार्थ कुछ नहीं था । मेरे हृदयकी बातको अघोरी समझ गया और कहींसे कुछ गुड़ लाया, वह गीला होनेके कारण उसमें बहुतसी मक्खियाँ चिपटकर मर गईं थीं, जिसको देखकर मुझे बहुत घृणा हुई पर मक्खियोंके साथही उसने गुड़ भी घोल कर पी लिया । मक्खियें साथ पी लेनेके बाद वह हुक्का पीने लगा । तम्बाकू पीते पीते धूँवाँ निकालता तो दो चार मक्खियाँ मुखसे निकल कर हवामें उड़ने लग जातीं, इसी प्रकार सब मक्खियोंको उसने धूँवाँकी राहसे बाहर निकाल दिया ।
इसी प्रकार काल निरञ्जन समस्त संसारकी उत्पत्ति, स्थिति और नाश किया करता है । अघोरी लोग निरञ्जनके मुख्य सेवकोंमें हैं, जब इनका साधन पूर्णताको पहुँचता है तब ये काल निरञ्जनसे मिलकर उसीके रूप हो जाते हैं ।
राजा लवण ।
उत्तरीय भारतके प्रसिद्ध महाराजा हरिश्चन्द्रके वंशमें लवण नामक एक राजा हुआ था । वह सर्वाङ्ग सुन्दर, विद्या, कला कोशलमें पूर्ण, राजकीय कार्योंमें निपुण, सदाचारी, न्यायी, शत्रुओंपर दया भी करने वाला, सेवकोंपर पुत्रके समान दृष्टि रखनेवाला, समानके राजाओंसे द्वेष रहित प्रीति करनेवाला और छोटे तथा पड़ोसके राजाओंकी रक्षा करनेवाला था, सब देशके वणिज लोग स्वतन्त्रता पूर्वक उसके राज्यमें वाणिज्य किया करते थे ।
एक दिन राजा सिंहासनपर बैठा दरबार कर रहा था कि, एक बाजीगर आया, यथायोग्य नमस्कार करके कहने लगा कि, मैं कामरूपदेशसे आया हूँ, बंगालेकी जादूगरी सीखा हूँ, विचित्र खेल दिखला सकता हूँ, यदि आज्ञा है तो कुछ कौतुक दिखलाऊँ । राजाकी आज्ञा पाकर तमाशा दिखलाने लगा । हाथमें एक मुछल लिया, उसको इधर उधर हिलाकर आकाशकी ओर फेंक दिया । वो आकाशमेंही लोप हो गया । बहुत देर न हुई थी कि, सिन्धदेशका एक दूत एक घोड़ा लिये हुये आया कहने लगा कि, यह घोड़ा समुद्रसे निकला