कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1202, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंइसमें शुद्ध करने और मुक्ति देनेकी शक्ति तो क्या होनी थी, इससे एक अद्वैत परमात्माकी स्थितिही प्रकट नहीं होती बरन् अनेक अर्थात् माया ही का विवरण प्रगट होता है।
(हल्लाह लाइला) नहीं अल्लाह मगर अल्लाह इससे स्पष्ट प्रगट होता है कि, यह कलमों किसी विशेष ईश्वरको वर्णन करता है, जैसा मैं प्रथम ही लिख आया हूँ कि, मूसा और इब्राहीम आदिका एक ही खुदा था। वही अब भी है और मूसाके खुदाकी अनेकता मैं भलीप्रकारसे प्रथमही सिद्ध कर आया, जैसा यह कलमा भ्रमिक और कल्पित है वैसे ही इसका परिणाम भी होगा क्योंकि जैसा मूल होता है वैसे ही डाल, पात, फूल, फल होते हैं। विहिस्त वगैरह की, जो आशा कुरान आदि दिलाते हैं वे मिथ्या कल्पित रोचक और भयानक वाक्योंमें वर्णित हैं। जो स्वयम् मिथ्या हो उसमें कोई कैसे जाकर रह सकता है।
जैसे हिन्दुओंका निर्गुण है वैसे ही मुसलमानोंका कलमा है। कलमा कहता है नहीं खुदा मगर है खुदा। प्रथम अस्वीकार फिर स्वीकार। विचार करनेकी बात है कि, ऐसा कलमा जिसका कि, कुछ ठिकाना ही नहीं किस प्रकार मुक्तिदाता बन सकता है? ऐसे भ्रमके कलमें पर विश्वास करके सब मुसलमान लोग धोखेमें बहे जाते हैं। ये जो कुछ रोजा निमाज तकबा तिहारत जप तप करते हैं सब उसी विहिस्तके लिये करते हैं जिसका कुछ ठिकाना ही नहीं। यदि मान भी लिया जावे तो भी उनके विहिस्तसे घृणा उत्पन्न होती है क्योंकि ऐसा बुद्धिहीन कौन है? जो प्रथम तो विषय वासना त्यागनेके लिये कठिनसे कठिन तपस्या करके मनको मारे, फिर परिणाममें उसी नीच और घृणित काममें फँसे।
तीसरे ईसाई महाशयोंसे कहना है कि, वे जो तसलीसको सत्यधर्मका मूल मानते हैं वो उनके भ्रम और कल्पनाके अतिरिक्त और क्या है? ईश्वर अविभाज्य है, उसमें विभाग कैसे हो सकता है? अखण्डको कौन खण्ड २ कर सकता है? जिसका खण्ड हो जाता है वह परमात्मा नहीं है, उसमें सब शक्ति नहीं। बाप, बेटा और पवित्रात्मा ये तीन हुये थे, ये कदापि सब शक्तिमान् नहीं हो सकते। जो सर्वशक्तिमान् है वह, अनन्त बापबेटा और पवित्रात्माओंको प्रगट कर सकता है। सर्व शक्तिमान सबसे निलैप है। ईसाईयोंकी तसलीस और हिन्दुओंकी तसलीस दोनों एकही बात हैं। हिन्दू ब्रह्म, जीव और माया कहते हैं। ईसाई बेटा, बाप और पवित्रात्मा मानते हैं। जब तक कोई अद्वैतको प्राप्त न करेगा तब तक मुक्ति नहीं प्राप्त कर सकता।