कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1249, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंअकल असर सब शगल किया है । शिकम किया है मिल्ला ॥
कहैं कबीर यह मसलें पढ़कर । मान बिगाने लिल्ला ॥
बुष्ट स्वभावको विद्याभिमानियोंने वर्तमान कालके लोगोंको ऐसा कठिन हृदय और कुमार्गी बना दिया है कि, संसारसे भक्ति और भजन उठ गया । विद्याभिमानियोंसे सद्गुरुकी सेवा बहुत कठिन है । वे बुष्ट सन्तोंके शत्रु हैं । उन्होंने समस्त संसारको भ्रष्ट कर दिया है । समस्त संसारमें अज्ञानता फैल गई है । सबके अन्तःकरण अशुद्ध हो गये हैं । न्यायी राजा और शासक लोग सर्वदा इस बातका ध्यान रखते हैं कि, सन्तों साधुओं और भक्तोंकी सेवा शुश्रूषा होती रहे कि, जिससे संसारमें ईश्वरका भय और भक्ति स्थिर रहे सन्तोंकी कृपादृष्टिसे लोक परलोक सुधरता है । सांसारिक शास्त्रोंके जाननेवाले अथवा सांसारिक विद्याओंके ज्ञाता तो सांसारिक व्यवहारकी बातोंमें सहायक हो सकते हैं, पारलौकिक उपदेशमें उनका कहना और सुनना तुच्छ है, बरन् उनकी धर्मव्याख्या सुनकर भी मनुष्य अज्ञानी होकर धर्मविरुद्ध काम करता है ।
मनुष्य वही है जो इस बातपर सोच विचार करेकि जिसको सांसारिक मनुष्य पूजते और अपना ईश्वर समझते हैं वह तो छल और कपटसे भरा हुआ है, वह सदा मनुष्योंसे कपट और धोखा करता चला आता है, ऐसे छली कपटीको अपना मुक्तिदाता मित्र समझते हैं । जिसको लोग पूजते हैं वह संसारमेंही बन्धन करनेवाली माया है ।
देखो योहन्नाकी इञ्जील ८ बाब १ आयत—हजरत ईसा स्पष्ट कहते हैं कि, चोर नहीं आता चुराने और कत्तल करनेको, मैं आया हूँ । हजरत तो हाँक मारकर कहते हैं कि, मैं चुराने और कत्तल कराने आया हूँ । फिर मत्तीकी इञ्जील १० बाब ३२ आयत—यह मत समझो कि, मैं पृथ्वीपर सुलह करवाने आया हूँ, बरन् तलवार चलवाने आया हूँ । इसमें हजरतका क्या अपराध है, उन्होंने तो स्पष्ट कह दिया, यदि यह बात ईसाइयोंके समझमें न आवे तो किसका अपराध ?
मूसाके खुदाने उससे साफ कह दिया था कि, मैंने कनआके बत्तीस बादशाहोंको मार लिया । मूसासे उन सभीोंको नष्ट करवा दिया । मुसलमानोंको किसने लड़ाई और जेहाद सिखलाया ? जिस खुदाने समस्त संसारको बाँध लिया उसी खुदाकी पूजा सब करते । जो उपरोक्त बातोंपर सोचे और विचार करे वही मनुष्य भक्तिका अधिकारी है ।