कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 127, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंलेलेवें । इसी भयसे वह उनको बहुत कष्ट देने, उनसे कठिन परिश्रम कराने और उनके बच्चोंकी हत्या करने लगा । उनके बेटोंको तो वह मार डालता और उनकी बेटियोंको जीवित रखता । इस प्रकार जब उनपर दारुण दुःख उपस्थित हुआ तब खुदाने उनपर दया प्रगट किया ।
इकसठवाँ प्रकरण
मूसाकी उत्पत्तिका वृत्तान्त ।
उमराव नामक एक इब्रानी था । उसका पुत्र मूसा उत्पन्न हुआ । वह मूसा बड़ाही सुन्दर था उसके माता पिताको बड़ी दया आयी कि, उसको फिरऊनके हाथ कैसे सौंपें । इससे उन लोगोंने उस बालकको टोकरीमें रक्खा और नदीके किनारे झाऊके वृक्षमें रख आये संयोगन फिर उनकी बेटी वहाँ स्नान करनेको गयी और उसने उस बच्चेको देखा, उसको उसपर दया आयी, उसने उस बच्चेको अपनी लौडीको सौंप दिया और वह दासी उस लड़केको अपने घर ले आयी । वह उसका पालन पोषण करने लगी, जब वह सीखने योग्य हुआ तब वह उसको शिक्षा देने लगी । यह मूसा फिरऊनकी बेटिका गोद लिया बालक ठहरा । वह मूसाको अपना बेटा समझकर उससे बड़ा प्रेम किया करती थी । मूसा मिस्र देशकी शिक्षा पाकर परम विद्वान् हुआ । जब उसका वय चालीस वर्षका हुआ तब उसने एक इब्रानीका पक्ष करके एक मिसरीको मार डाला, फिर उसको फिरऊनका भय हुआ कि, मिसरीके बदले में भी मारा न जाऊँ । तब वह मिश्रदेशसे भागकर कनआँमें गया और मदियानामें रहने लगा । वहाँ पितरू नामी एक इब्रानीकी बेटीके साथ उसका विवाह हुआ । वह अपने श्वशुरकी भेड़ बकरियाँ चराया करता था ।
कुछ दिनोंके पश्चात् खुदाने आज्ञा दी कि, ऐ मूसा ! तू मिस्रदेशको जा और अपनी जातिको फिरऊनके जुल्मसे बचा ।
उस समय मूसाकी उम्र अस्सी वर्षकी थी, कारण यह कि, मूसामें चालीस वर्षके वयमें मिस्रदेशसे भागा था और वह चालीस वर्षतक अपने श्वशुरकी भेड़ बकरियाँ चराता रहा । परमेश्वरकी आज्ञासे मूसा मिस्रदेशको गया, परमेश्वर उसके साथ था । उसने अनेक चमत्कार दिखलाये । तब फिरऊन बादशाहने इब्रानियोंको मूसाके साथ जानेकी आज्ञा दी । जब मूसा तीनलाख इब्रानियोंको लेकर, जिन बाल युवा बृद्ध बालिका स्त्री वृद्धा सभी थीं, मिस्रदेशसे कनआनकी ओर चला और लाल समुद्रके समीप पहुँचा, अर्थात् एक पड़ाव तक कूच कर आया । तब फिरऊन पछताया कि, इब्रानियोंको तो हमने बिदा कर दिया, हमारी सेवा