भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 128

तथा बेगार कौन करेगा । यह सोचकर उसने आठ लाख फौज लेकर उनका पीछा किया । जब यहूदियोंने देखा कि, फ़िरऊन हमारे पीछे धावा किये आरहा है, तब वे रोये और पुकारा कि, मूसाने व्यर्थही हमारे प्राण नाश किये । क्यों कि, हमारे दोनों ओर दो पर्वत हैं सामने लाल समुद्र है । और पीछे २ फ़िरऊन अपने दलबल सहित चढा चला आता है, हम अब कहाँ जायँ कहीं भागनेकी राह नहीं रही । तब मूसाने खुदासे प्रार्थना की । तब खुदाने कहा कि, ऐ मूसा तू नदीमें अपना सोंटा मार मूसाके सोंटा मारतेही समुद्रका जल फट गया और पानी दोनों ओर पर्वतके समान खड़ा हो गया । मध्यमें शुष्क पथ प्रगट हुआ । अब मूसा समस्त इब्रानियोंको अपने साथ लेकर पार उतर गया । पीछे फ़िरऊन आया और अपने दलबलसहित उसी समुद्रीय रास्तेसे पार जाना चाहता और समुद्रमें घुसा, तब फिर परमेश्वरने आज्ञा दी कि, ऐ मूसा ! पुनः समुद्रकी ओर सोंटा बढ़ा । मूसाने वैसाही किया । तब दोनों ओरका जल मिल गया और फ़िरऊन ससैन्य मर गया । पश्चात् मूसा प्रसन्नतापूर्वक बनी इसराईलको अपने साथ लेकर चला । जब वह सीना पहाड़के समीप पहुँचा और पडाव किया तब मूसाका आसमानी रङ्गका परमेश्वर बैकुण्ठसे सीना पहाड़ पर उतरा । उस समय समस्त पर्वतसे धुँवाँ उठने लगा और वहाँ पर मूसा तथा आसमानी रङ्गके परमेश्वरसे बातें होने लगीं ।

इस स्थानपर खुदा (विष्णु महाराज) ने ऋग्वेदसे कुछ बातें निकालकर और सांसारिक रीत व्यवहारको इच्छानुसार वर्णनकर, उसे बनी इसराईलके योग्य समझकर, मूसाको प्रदान किया । वही किताब मूसाकी तौरीतके नामसे विख्यात हुई । यह पहली किताब है जो पश्चिमीय देशवासियोंको मिली । यद्यपि उसका ढङ्ग बदल गया पर उसको ऋग्वेदही मानना चाहिये । कोई तौरीत पढे और कोई ऋग्वेद पढे, एकही फल प्राप्त होगा, इसमें कोई संदेह नहीं है ।

बासठवाँ प्रकरण

दूसरी किताब जबूरका वृत्तान्त ।

यह किताब जबूर दाऊदके लिये उत्तरी, यह जबूर पुस्तक सामवेदसे है । सामवेद गीतों तथा पदोंसे भरा हुआ है सो वही जबूर पुस्तक है, दाऊद कवी बड़ा गवैया था । वह परमेश्वरके प्रेममें लीन रहा करता था, बडे प्रेमके साथ खुदाकी स्तुति रागोंमें किया करता था । उसके रागोंमें इतना प्रभाव था कि, पाषाण भी मोम होजाता था । दाऊदके गीतोंकी बड़ी प्रशंसा किताबोंसे लिखी है और मूल इसका सामवेद है । और सामवेदके गुण तथा उत्तमता संसारमें प्रगट है, अंग्रेजी