भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 287, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 287

जाकर पूछो तो वह कुछ उपाय बतला सकते हैं । इस बात पर नीमा नीरू स्वामी रामानन्दके आश्रमपर गये, किन्तु, वहाँ तो हिंदुओंमें से भी कितनी जातियोंका प्रवेश नहीं हो सकता था । क्योंकि, स्वामी रामानन्दजी शूद्रोंका मुहँ तक नहीं देखते थे । फिर मुसलमान वह भी मुसलमानोंमें भी सबसे नीच जाति जुलाहेकी गुजर वहाँ तक कैसे होसकती थी किन्तु “जिन ढूँढा तिन पाइयों” के अनुसार नीमा नीरूकी सच्ची लगनने, किसी प्रकार उनकी प्रार्थना स्वामी रामानन्दजी तक पहुँचा दी, तब स्वामीजीने ध्यान धरके बतलाया कि, एक कोरी (कुमारी) बछिया लाकर बालककी दृष्टि सन्मुख खड़ी कर दो, उसके थनसे दूध निकलेगा उसीको बालकको पिलाओ वह पी लेगा । नीमा नीरूने वैसाही किया और उस दिनसे सिद्ध बालक कबीर दूध पीने लगा ।

इकचालीसवाँ प्रकरण ।

बाल लीला ।

जब आप कुछ बड़े हुए तब छोटे छोटे लड़कोंके साथ खेलने लगे, उस समय आप उन लड़कोंसे ब्रह्मज्ञानकी बातें किया करते थे । वे बेसमझ क्या समझें । तब आप साधुओंके साथ बातें करने लगे । जब साधु लोग आपका ज्ञान सुनते तब अत्यंत आश्चर्यान्वित होते कि, यह छोटा बालक इस प्रकारकी बातें कैसे करता है ? इन बातोंकी सुध तो बड़े बड़े साधुओंको भी नहीं है, इसने चौथे पदकी बातें कहाँसे सीखीं ! साधुओंको विदित हो गया कि, यह बालक नहीं बरन् कोई सिद्ध है, लड़केके वेषमें प्रगट हुआ है ।

कबीर साहबके उस बालपनके अनेक कौतुकोंका विवरण ग्रंथोंमें लिखा है—उस समय जलनके रोगका काशीमें प्रकोप था । एक बूढ़ा स्त्री आयी और आप धूल मिट्टी खेल रहे थे । कबीर साहबसे बोली कि, मैं जलन रोगसे व्यथित हूँ, यदि तेरी इच्छा हो तो मैं आरोग्य लाभ करूँ । तब कबीर साहबने उस स्त्रीपर थोड़ीसी धूल डालदी और वह आरोग्य हो गयी और सुखी होकर प्रसन्न होती चली गयी । इस प्रकारकी अनन्त कथाएँ आपके बाल लीलाकी प्रसिद्ध हैं ।

बृहत् कबीर कसौटीसे बाललीला ।

जब कबीर साहब कुछ बड़े हुए और छोटे २ लड़कोंके साथ खेलने लगे तब आप उन लड़कोंसे ब्रह्मज्ञानकी बातें करते, किन्तु वे संस्कार हीन बच्चे उन बातोंको तो समझते नहीं । परन्तु उधरसे चलनेवाले साधु संत अथवा कोई