कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंतब नौवाब बिजलीखों बोले कि, मैं आपको ऐसा कदापि नहीं करने दूंगा, मैं मुसलमान धर्मानुसार उनका कफन दफन करूँगा, तब कबीर साहबने देखा कि ये दोनों युद्धके निमित्त प्रस्तुत हैं, इसमें व्यर्थका रक्तपात होगा, दोनोंको युद्धके निमित्त प्रस्तुत, और दलबल सहित देख, समझाकर कहा कि, सावधान ? आपसमें विवाद न करना । कदापि शस्त्र मत चलाना, जो मेरी बात मानेगा सो प्रसन्न रहेगा, सत्यगुरुकी आज्ञाको दोनों दलोंने स्वीकार कर लिया । तब सबोंने सत्यगुरुको दंडवत् प्रणाम किया, सबका चित्त खेदसे भर गया । तब कबीर साहबने चलानेका शब्द पढा चादर तानकर लेट गए, अपने मुंहपर कपडा लेलिया । लोगोंसे कहा कि, अब इस कोठरीका ताला बंद कर दो, लोगोंने वैसाही किया । जब ताला बंद किया तब एक ऐसा शब्द हुवा कि, जिसको सुनकर उपस्थित मनुष्योंके चित्तपर बड़ा प्रभाव पडा । जय जयकार हुवा कि, सत्यगुरु सत्यलोकको सिधार गए ।
जब उस कोठरीका ताला खोला तब केवल दो चादर मिले और कुछ कमलके पुष्प मिले, इनमेंसे एक चादर और आधे फूल राजा वीरसिंहने लिए, दूसरी चादर और कमलके फूल नौवाब बिजलीखॉने लिये । कबीर साहबका शव कहीं दिखलाई नहीं दिया । राजाने चादर तथा पुष्प लेकर सत्यगुरुकी समाधि बनायी । बिजलीखॉनेभी कबर बनायी और वह समाधि तथा कबर मगहदेशमें इस समयभी वर्तमान है ।
हिन्दू मुसलमान दोनों गुरुभाइयोंने एक मन्दिर बनाया । अब भी हिन्दू मुसलमान दोनों कबीरपंथी वहाँ मौजूद हैं । आमी नदी जो बहुत कालसे शुष्क पड़ी थी, उसमें जल भर गया, जो अबतक प्रवाहित है । अगहन शुदी एकादशी सम्बत् १५७५ विक्रमीको कबीर साहब छिप गये । अन्तिम प्रागटचमें एक सौ उन्नीस वर्ष पाँच महीने और सत्ताईस दिवसोंपर्यन्त आप पृथ्वीपर प्रगट हो लोगोंको शिक्षा देते रहे ।
कबीर साहबका आदि और अन्तमें शरीर नहीं था केवल एक तेजका प्राकटच था । ऐसा कबीर साहबका प्रगट होना तथा छिप जाना है । जब इच्छा हो तब प्रगट हों, जब इच्छा हो तब छिप जावें । जब कबीर साहब मगहरमें गुप्त हुये, तब पुनः मथुरा नगरमें प्रगट हुये, वहाँ रत्ना को शिक्षा देकर फिर धर्मदासजीको बोधागढमें दर्शन दिये । उनको सब सत्यपंथका पथ और धर्म-कर्मकी राह बता बयालीस वंशके नियम भली प्रकार कहे एवं कालपुरषके कपटजालसे भली भाँति सावधान करके अन्तर्धान हो गये ।