भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 456, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 456

वाक् चैतन्य वाहन, ज्ञान देह, विज्ञान अवस्था, सुषुम्णादेव, चैतन्य शून्य, निरारंभ द्वैदली यानी अनारम्भ द्वितीय, भीतरी मात्रा दो। बाहरली मात्रा दो, स्थित तथा प्रकाश, अजपा जाप एक सहस्र। घडी दो, पल छियालिस हर्ष चिन्ह, द्विमात्रा अकार, तत्त्व जीवहंस, पूजा मानसी, सोहम् भाव करके पूजे सुगंधि इतर इत्यादिसे मैं पूजा करता हूँ। ॐ अष्टमे बलवान् चक्रं नासिकास्थानं ओंकारो देवता पुसुषुम्णा शक्तिः विराट् ऋषिः त्रिवर्णीद्विदल त्रिमात्रा अकार उकार मकार सत्त्वगुण रजोगुण तमोगुण ब्रह्माविष्णुरुद्राः पृथ्वी अप तेज वायु आकाश प्राण अपान समान ध्यान उदान ५ शब्द स्पर्श रूप रस गंध ५ नाग कूर्म कुकल देवदत्त धनंजय ५ मन बुद्धि चित्त अंतःकरण अहंकार ५ इडा पिगला सुषुम्णा ॥ ओम् आठवें बलवान् चक्र नाकके स्थानमें है। ओंकार देवता, शुम्णा शक्ति, विराट् ऋषि, तीन अक्षर, दो पत्ते, तीन मात्रा, अकार, उकार, मकार, सत्त्वगुण, रजोगुण, तमोगुण, ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु आकाश, प्राण, अपान, समान, उदान, ध्यान, शब्द, रूप स्पर्श, रस, गंध, नाग, कूर्म, कुकल, देवदत्त, धनञ्जय, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, अन्तःकरण, इडा पिगला सुषुम्णा ॥

ॐ सप्तमम् विशुद्धचक्रं कण्ठस्थानं ध्रुववर्णं जीवो देवता आद्या शक्ति विराट् ऋषिः वायुवाहन उदान वायु ज्वाला काला ज्वालाग्निवेदः महाकारण देह तुरीया अवस्था परा बाचा अथर्वण वेद जंघ पलङ्ग समता भूमिका सालोक्यता मोक्ष षोडशदलानि १६ षोडश मात्रा १६ अ आ इ ई उ ऊ ऋ ॠ लृ ॠ ए ऐ ओ औ अं अः अंतर मात्रा १६ बहिर्मात्रा १६ विद्या १ अविद्या २ इच्छा ३ क्रिया ४ ज्ञानशक्तिः ५ भूतल ६ महाविद्या ७ महामाया ८ बुद्धि ९ तामस १० मन्त्र ११ मात्रायणी १२ कुमारी १३ रौद्री १४ पुस्ता १५ सिंहिनी १६ अजपाजापमेक सहस्र १००० घटिका २ पल ४ अक्षर ४० पूजा मानसिका सोहंभावेन पूजयेत अत्र गंधादिसमर्पयामि नमः ॥ ओम् सातवें विशुद्धचक्र है, यह ध्रुवेके रङ्गका है। जीव देवता है आदि शक्ति है विराट् ऋषि है वायु वाहन है उदानवायु है ज्वालाकला है। ज्वाला अग्निवेद है महाकारण देह, तुरीया, अवस्था, परा, बाचा, अथर्वणवेद, जंघ, पलंग, समता भूमिका, सालोक्यता मोक्ष, सोलह पत्ती, सोलह मात्रा इत्यादि ॥ अ आ इ ई उ ऊ ऋ ॠ लृ ॠ ए ऐ ओ औ अं अः ये सोलह बीज हैं। भीतरी मात्रा सोलह। बाहरी मात्रा सोलह। विद्या, अविद्या, इच्छा, क्रिया, ज्ञान, शक्ति, भूतल, महाविद्या, महामाया, विधि, तामस, यज्ञ मंत्र, मात्रायणी, कुमारी, रुद्र, पुष्टता, सिंहिनी। अजपा-

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश) · पृष्ठ 456, कुल 1367 में से · BharatKosha