कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 745, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंसकता । यदि आपको खुदाकी पहचान होती तो आपको सांपकी सूरतमें शैतान कद पि न बहका सकता तौरीतमें उत्पत्तिके तीसरे बाबकी आठ आयत पर्यन्त लिखा है कि, सर्पके स्वरूपमें शैतान आया और आदम तथा हौवाको बहकाया । जिस फलके लिये खुदाने मना किया था, दोनोंने उसी फलको खाया इसी कारण दोषी होकर वैकुण्ठसे निकाला गया । यहांतक कि, इस सापने अपने विचित्र रङ्ग ढङ्ग दिखाये अनुमानसेभी मालूम नहीं किया कि, यहां तो दालमें काला है, खुदाकी आजोललंघन करके फल खालिया ।
लिखा है कि, पहले शैतानने हौवाको बहकाया । भला यदि हजरतको आत्मिक प्रकाश तथा भीतरी विद्या होती तो इतना भी न जानते कि, शैतान मेरी पत्नीको बहकाने आता है मैं इसकी रक्षा करूँ उसके पाजीपनेसे विज्ञ करूँ उसको आपत्तिसे सचेत करूँ । नबियोंके प्रतिष्ठित नबीको इतनी दूरदर्शिता एवं अन्तर-दृष्टि नहीं थी । फिर आपको आवागमनकी सुधि कैसे मिले, जान बूझकर भी कोई धोखा खाता है ? अपनेको तथा अपनी सन्तानको दीनता तथा दुर्बस्थामें डालता है ? यदि आप सर्परूपी शैतानको नहीं पहचान सके तो मनुष्यरूपी खुदाको कैसे पहचान लिया कि, वह वास्तवमें खुदा था अथवा अन्य न जाने कौन था ।
कुरान शरीफके टीकाकारोंने लिखा है कि, जब प्रथम बार गर्भिणी हुई तब शैतान उसके समीप जाकर पूछने लगा कि तेरे पेटमें यह क्या है किस पथसे बहिर्गत होगा । यह बात सुनकर हौवाने उत्तर दिया कि, मैं नहीं जानती । तब शैतानने कहा कि, कदाचित तेरे पेटमें कोई पशु हो वो तेरा पेट फाड़कर निकले । इतनी बात कहकर शैतान तो चला गया । हौवाने आदमसे सब हाल कहा । दोनों बहुत चिन्तित हुये । दोनों इसी चिन्तामें पड़े थे कि, कुछ दिवसोंके पीछे पुनः शैतान आया पूछा कि, तुम दोनों चिन्तित क्यों हो ? उन्होंने अपने दुःखका हाल कहा, तब शैतानने कहा कि भयभीत मत हो, मैं इसमें आजम जानता हूँ मेरी प्रार्थना स्वीकार हुआ करती है । मैं खुदासे प्रार्थना करूँगा कि हौवाके पेटसे तुम्हारे स्वरूप का पुत्र उत्पन्न हो, एवं सुखसे बाहर आवे । परन्तु बात उतनी है कि, तुम उस पुत्रका नाम अब्दुलहारिस रखना । आदम और हौवाने शैतानके धोखेको न जाना जब उनका प्रथम पुत्र उत्पन्न हुआ तब उसका नाम वही (अब्दुलहारिस) रखा और कुफ्रके भागी हुये ।
हसनकी तफसीरमें लिखा हुआ है कि, जिस समय शैतान वैकुण्ठमें था; उस समय उसका नाम अब्दुलहारिस था । जानना चाहिये कि, वही हजरत आदम हैं जिसके कि भीतर खुदाने अपनी रूह फूँककर अपने स्वरूपका बनाया और