कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 746, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंसमस्त फिरिश्तोंने दण्डवत किया, वे तनिकभी शैतानी धोखेको नहीं समझ सके उसके बहकानेसे धोखेमें आ गये ।
हजरत नूह-हजरत आदमके पीछे हजरतनूह (जो दूसरे आदम कहलाते हैं) बड़े प्रतिष्ठित नबी हुये । उनको भी खुदाका दर्शन हुआ करता था एवं खुदासे वार्तालाप भी हुआ करता था । खुदाके आज्ञानुसार बाढ़के समय (जल प्रलयके समय) आप नावपर सवार हुये ।
तौरीतमें उत्पत्तिके पुस्तकका (८) बाब (३ स १३) आयत पर्यन्त लिखा है कि, बाढ़के उपरान्त आपका नाव अरारात पर्वतपर ठहरी । नूहने खिड़की खोल देखकर जानना चाहा कि, पृथ्वीका जल शुष्क हुआ अथवा नहीं, इस अभिप्रायसे आपने नावपरसे एक कौवा उड़ाया और वह उड़कर गया । जबतक पृथ्वी का जल शुष्क न हुआ वह काग आया जाया करता था । फिर नूहने एक कबूतर उड़ाया जिसमें मालूम करें कि पृथ्वीका जल अभीतक सूखा है वा नहीं । कबूतर पृथ्वीपर अपने पंज्जे लगानेका स्थान न पाकर फिर नावमें आया । क्योंकि, समस्त पृथ्वीपर जल था, उस कबूतरके आनेपर नूहने उसको अपने हाथोंपर ले लिया उसने सात दिवसोंतक सन्तोष किया । आगे फिर कबूतरीको उड़ाया वह सौझके समय जैतून की पत्ती मुँहमें दबाकर फिर उसके पास पलट आयी । तब नूहने जान लिया कि, अब पृथ्वीपर जल कम हुआ है । इसके पीछे कबूतरीको उड़ाया । वह फिर कभी न आयी तब नूहने जान लिया कि, अब पृथ्वी सूख गयी, तब और भी सात दिन ठहरा । इसके पीछे उसने नावकी छत खोलकर देखा कि, भूमि शुष्क हो गई अथवा नहीं । खुदाकी आज्ञासे नूह समस्त मनुष्यों और जीवोंसहित पृथ्वीपर आ खेतीमें लग गया ।
समीक्षा-अब जानना चाहिये कि, जिस मनुष्यको परमेश्वरका दर्शन हो उससे वार्तालाप हुआ करे उसमें इतना सामर्थ्य भी न हो कि, बिना पशुओंके सहायताके वह पृथ्वीका सूखा और गीला होना जान सके, यदि तीक्ष्ण दृष्टिवाला मनुष्य पर्वतसे पृथ्वीकी ओर देखे तो पृथ्वीकी तरी और उसका सूखापन देख सकता है । यदि नङ्गी आंखोंसे नहीं देखे तो दूरबीनसे तो अवश्यही देख लेगा । जिसको पृथिवीके गीला और सूखा होनेका हाल न मालूम हो उसको आवागमन की विद्या कैसे ज्ञात हो सकती है ।
३ हजरत इबराहीम-नूहके पीछे खुदाके प्यारे और श्रेष्ठ नबी हुए । आप भी खुदाका दर्शन किया करते थे । आपसे खुदा वार्तालाप किया करता हुआ मिहमानी कबूल किया करता था । जब खुदा आपके घर मिहमान आया तब