कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextआपने बड़ी मिहमानी दिखाई । देखो तौरीतमें उत्पत्तिके (३८) बाब (१) से (८) आयत पर्यन्त लिखा है कि, इबराहीमको मनुष्यके स्वरूपमें तीन फिरिश्ते मिले जब हजरतने उन फिरिश्तोंको देखा तब आपने पृथ्वी पर्यन्त झुककर दण्डवत् करके कहा कि, ऐ मेरे खुदा ! ऐ मेरे खुदा ! ! और आपने तीनों खुदाओंकी बड़ी आवभगत की । एक बछरा मारकर तला मांस रोटी लिया । तीनों खूदाओं ने इबराहीमको आशीर्वाद दिया अपना भेद प्रगट किया कितने ईसाई समझते हैं कि इन तीनों फिरिश्तोंमें दो फिरिश्ते थे तीसरा स्वयम् यह बाह् था जिसका कि नाम अत्यन्त प्रतिष्ठापूर्वक लिया जाता है ।
फिर कुरानके (१४) सिपारा सूरे कहफके सातवें स्कूअमें लिखा है कि, अब इब्राहीमके समीप तीन रिफिश्ते आये तब आपने मिहमान समझकर एक बछरेको मारकर तला इन तीनों मेहमानोंके सामने धर दिया । उन्होंने भोजनसे अपना हाथ खींच लिया न खाया तब इबराहीमने अनुमान किया कि, वे तीनों चोर हैं क्योंकि, उस देशकी यह परिपाटी थी कि, जो कोई किसीका धन अपहरण किया चाहता था वह उसका नमक न खाता था । यदि नमक खाये तो उसके घर चोरी न करे । इबराहीमके पास माल तथा पशु अधिक थे इससे जाना कि, ये तीनों निस्सन्देह चोर हैं । इस कारण मेरा नमक नहीं खाते हैं । जब इबराहीमके मनमें यह सन्देह हुआ तब उन तीनोंने जान लिया और बोले कि, ऐ इबराहीम ! हम तीनों फिरिश्ते हैं चोर नहीं । सद्मम तथा अमूरा दोनों नगरोंका नाश करने आये हैं । इससे इबराहीमने विश्वास कर लिया कि, ये निश्चयही फिरिश्त हैं । जब तीनोंने अपना भेद कहा तब फिरिश्ता जाना, नहीं तो चोरही समझा था । यह बात उस समयकी है जब इबराहीम वय एक सौ बीस वर्षका था । आपके पहिले उम्रके वृत्तान्त कुरानमें इस प्रकार लिखा है कि, आप लड़कपनमें जब दिनको देखते थे तब आप कहते थे कि, यह मेरा खुदा है, जब दिन बीतकर रात आती थी तब कहते थे कि, वह तो मेरा खुदा नहीं था पर यह मेरा खुदा है । जब रातभी बीतजाती तब कहते कि, यह तो मेरा खुदा नहीं, जब सूर्य को देखते तब उसको अपना खुदा बताते । जब वह छिप जाता तब कहते कि, वह मेरा खुदा नहीं, कारण यह कि, वह तो अस्त होगया । जब चन्द्रमाको देखते तब कहते कि, यह मेरा खुदा है जब वह भी छिप जाता तब उससे भी निराश होते । फिर तारोंको खुदा कहते । फिर उनसे भी निराश होजाते ।
रोजतुस्सफामें हजरतकी अन्तिम वयका विवरण इस प्रकार लिखा है । इबराहीमने खुदासे प्रार्थनाकी थी कि, ऐ खुदा ! मेरी इच्छा बिना मेरे प्राण नाश