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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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हजरत आदम पाशविक अवस्थासे कभी पृथक् न होते । केवल शैतान गुरुकी दयासे आदमको पैगम्बरी मिली, आजतक सब विद्याओंके सीखनेका उद्योग करते हैं । यदि अबलीस गुरु न होता तो सब आदम और सारे आदमजाद निकम्मे होते । अतः उस गुरुको हमें धन्यवाद देना उचित है । जिसने हमको सभी आनन्दोंको दिया और अचेतनासे पृथक् करके परिभ्रम और भजनमें लगा दिया हम विद्या प्राप्त करके कथन करने लगे कि —

बर सरे दारम कुलाहे चरा तर्क ।

तर्क दुनियाँ तर्क उकबा तर्क मौला तर्क तर्क ॥

तात्पर्य—मनुष्य कहता है मैं अपने शिर पर चार तर्क (त्यागोंकी) टोपी धारण करता हूँ । मुझको संसारमें ही खुदाने वैकुण्ठका आनन्द दिया था । जबसे मुझको कर्तव्याकर्तव्यका ज्ञान न हुआ तबसे जिनको छोड़ना यद्यपि कठिन था, ऐसे संसारिक आनन्द परित्याग कर दिये । जब संसारको छोड़ा तब दूसरे लोकको ढँढ़ने लगा, परलोकके सर्व आनन्द प्राप्त हो चुके तब बुद्धि तथा सोचसे परलोक के भी सर्व पदार्थ अस्थाई तथा तुच्छ प्रतीत होने लगे, उनको भी देख भाल कर छोड़ दिया । दो तर्क हो चुकी । फिर मौलाको ढूँढ़ने लगा । मौलाकी खोजमें जब अपना प्राण अर्पण कर चुका खुदामें लीन हो गया तब खुदासे मिला । अब तो बूंद तथा नदीमें कोई विभिन्नताही नहीं रह गई दोनोंही एक हो गये । फिर तो आपही आप रह गया फिर कौन मैं हूँ, जो कुछ संसारमें होता है सो सब कुछ मैं करता हूँ और मैं भोगता हूँ, किसीका तर्क करूँ ? तर्कहीका तर्क हो गया अथवा दूसरा इसका यह भी अर्थ है कि, हे मनुष्य ! तू संसार, स्वर्ग और विज्ञताके अभिमानको छोड़ दे एवं इस अभिमानको भी छोड़ दे कि मैंने सब छोड़ दिया ।

९ तौरीतमें उत्पत्तिका—(२५) बाब (२१ से २६) आयत तक देखो । इसहाकने अपनी स्त्री रबकाके लिये प्रार्थना की कि, उसके पुत्र उत्पन्न हो क्योंकि, वह बाँझ थी । खुदाने उसकी प्रार्थना स्वीकार की, उसकी स्त्री गर्भिणी हुई उसके पेटमेंके दो पुत्र आपसमें लड़ने लगे । तब वह खुदासे पूछने गई कि, यदि यों है तो ऐसा क्यों है ! खुदाने उससे कहा कि, तेरे पेटसे दो बहुत बड़ी जातियां उत्पन्न होंगी बड़ा पुत्र छोटेकी सेवा करेगा ।

समीक्षा—वे दोनों लड़के माताके गर्भसेही लड़ते झगड़ते चले आये । वही वैर दोनोंमें प्रगट हुआ । यदि उनके पूर्व जन्मका वैर उनको ढाँवाडोल न करता तो वे आपसमें क्यों लड़ते ? केवल प्रारब्धिने उनको उसी तराजू पर धरकर तौला । जैसा कि, उनके पूर्वजन्मोंके कर्मोंने इनको गति दी थी पूर्वजन्मके कर्मानुसार इस अवस्थाका स्वरूप प्रगट हुआ इससे आवागमन स्पष्टरूपसे प्रमाणित हो गया ।