कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 808, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ें६२ भूल— मुहम्मदियोंका ऐसा विश्वास है कि, एक बार उत्पन्न होकर करोगे, मरकर फिर जीवित होंगे, फिर कभी न मरोगे। इससे वे महाप्रलयके जीवनको समझते हैं। वो बात नहीं बरन् यह परमेश्वरमें लीन हो जानेकी बात है।
६३—बहुतरे महम्मदी अज्ञानतावश समझते हैं कि, मुझे निर्दोषकी परमेश्वरने नरकी बनाया। अथवा कष्टोंमें फँसाया।
अमीर खुसरो
न्याव न कीन कीन ठकुराई । विन कीने लिखि दीन बुराई ।
मौलवी रूम
हफ्तसद हफ्ताद कालिब दीदः अम् ।
बारहा चूँ सबजये रुईदः अम् ॥
मगज कुरआं अज जहाँ बरदाश्तम् ।
उस्तख्बों पेशे सगां अन्दा खतम् ॥
अर्थात् सात सौ सत्तर देह मैंने धरी, अनेक बार घास पातके संदूश जमा। कुरानका सार मैंने लिया, उसकी हड़डी (निःसार) कुत्तोंके सामने डालदी
६४—सयद भषशाहका वचन —
लख चौरासी बेलि लगाई । बेलि भरम भूलो मत भाई ॥
६५—इमाम जाफर साहिब—हयातुलकल्लबमें लिखा है हजरत इमाम जाफर साहबने फरमाया है कि, जब खुदाने जिबरईल इत्यादिको पृथ्वी पर मिट्टी लेनेको भेजा जिसमें कि, वह आदमकी प्रतिमा बनावे, उस समय पृथ्वी रोई चिल्लाई, क्योंकि, पृथ्वी अत्यन्त प्राचीन है इससे मनुष्योंके कुकम्मोंको सदैवसे जानती है। नहीं तो यह पृथ्वी कदापि रोती चिल्लाती नहीं। मनुष्योंके कुकम्मोंको यह जानती है।
६६ आदम और बेलकी बात — हदीसोंमें आया है कि, जब हजरत आदमको खुदाने बैकुण्ठसे निकाल दिया। इसके पीछे जिबराईलको भेजा कि, आदमको हल जोतना सिखलावे वँसाही हुआ। आदमने बेलको एक डण्डा मारा। बेलने कहा कि तू मुझको निर्दोषको क्यों मारता है? तू स्वयम् दोषी है। इससे प्रगट हुआ कि, मनुष्यमें पशु तथा पशुमें मनुष्य गमन कर रहा है। दोनोंमें एक, आत्मा है।
मसी हुद्ज्जाल ।
६७—लिखा है कि, महाप्रलयके पूर्व मसीहुद्ज्जाल प्रगट होगा।