भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 810

शहाद व नमरुद खुदा खुदको बताई ।
दशकंधर दुयौंधन को सीख सिखाई ॥
इवराहीमने सिखलाने में औकात गँवाई ।
मूसा की नसीहत फिरऊन फहम न आई ॥
टूटे न किसी हाल करम कालके धागे ।
तदवीर नहीं चलती है तकदीर के आगे ॥
दरगह से हुआ चोर करम डोर का बंधा ।
यम बन्द पड़ा है विषयानन्द यह अन्धा ॥
जाने नहि करता आजिज जीव जो बंधा ॥
हों पार निराधार शब्द सारके संधा ॥
पस होगये तापस मूँडचा मौन व नागे ।
तदवीर नहीं चलती है तकदीर के आगे ॥

आवागमननेही तकदीर ठहराया है और दूसरे किसीने नहीं ।

७०—जैसा कि, मैं पहले समाचारोंके अनुसार लिख आया हूँ कि, सब रुहँ मुहम्मदकी आत्माके गिर्द घूमा करती थीं । कारण यह कि, कबीर साहबके कथनानुसार मुहम्मद महादेवका औतार है । महादेव तमोगुण है, तमोगुणसे समस्त संसारकी उत्पत्ति है । सब तमोगुणसे बँधे हुये हैं सब तमोगुणको अपना राजा मानते हैं । इस कारण उसके चारों ओर फेरी करते हैं । वे अनगिनती जन्मोंसे बराबर आवागमन करते चले आते हैं । तमोगुण अर्थात् अन्धकार संसारका गुरु है ।

७१—बंचित रहनेका कारण — जब मुहम्मद साहबको पैगम्बरी मिली, तब आपके लिये खुदाकी ओरसे बही उत्तरा करती थी । उसके द्वारा आप कर्तव्याकर्तव्यकी बात बताते थे । इससे आवागमनका अंतर प्रकाश न रखते थे । सब पश्चिमी देशके पैगम्बर चार कारणसे आवागमनकी विद्याके जाननेके योग्य नहीं हो सके । उनके किसी पूर्व नबीको आवागमनका समाचार नहीं मिला और न कहा । इस कारण उनको इस बातका ध्यान भी नहीं हुआ । आवागमनके ज्ञान न होनेका कारण उनका मास भोजन तथा मदिराका पीना था जो उनके मनमें प्रकाश नहीं होने देता था । मांसाहारियोंसे कठिन तपस्या तथा वासनादमन नहीं हो सकती । इस कारण वे आवागमनकी विद्या जाननेसे वञ्चित रहे ।