भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 811, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 811

७२—चारवेद और किताबोंके सब विद्वान शरीयत, तरीकत, हकीकत, मारफतमें फँसे रहे। अल्प विद्या रखते थे इस कारण उनकी स्वच्छता नहीं हुई। आवागमनका ज्ञान हंसको अवस्था बिना प्रगट नहीं होता। मनुष्यकी चारों अवस्थाएँ बन्धन हैं।

अचेतावस्था—सुतरां डाक्टर गोल्डस्मिथके एनिमेटेंड नेचरमें लिखा है कि, एक विद्यार्थीको उसके शिक्षकने कठिन लेख लिखनेको दिया कि, उसको उसका लिखना कठिन हो गया। जब रातके समय अपने घर आया तब प्रदीप जलाकर लिखना चाहा। परन्तु वह इतना कठिन था कि, उसकी समझमें न आया तब विवश होकर सो गया। कुछ कालतक सोकर वह फिर उठा, लैम्प समीप रखकर उचितरूपसे लेख लिखकर फिर सोगया। जब सबेरे उठा तब अपना लेख भली प्रकार ठीक और अपने हस्ताक्षरमें लिखा देख बड़ा आश्चर्यान्वित हुआ। जब पाठशालामें गया तब उसने अपने शिक्षकसे कहा कि, मुझे बड़ा आश्चर्य है कि, मैंने तो इस लेखको लिखा नहीं था बरन् में अचेत होकर सो गया था, न जाने कौन मेरा यह लेख मेरे हस्ताक्षरमें लिख गया? क्या जाने कौन जिन्न या भूत लिख गया? यह बात सुनकर उसके शिक्षकको भी बड़ा आश्चर्य हुआ। चाहा कि, इस बातका यथार्थ जानें। उसने उस दिन और कठिन लेख लिखनेको दिया इसी प्रकार जब वह रातको अपने घर आया, बहुत सोच तथा चिन्ता करके विवश सोगया क्योंकि, उसको लिखना न आया इसी कारण सोगया अपने पलँगसे उठा। पूर्वानुसार उस लेखको अत्यन्त सावधानीसे लिखकर फिर सो गया। जब प्रातःकाल उठा तब वह लेख अपने हस्ताक्षर द्वारा लिखा हुआ पाकर अत्यन्त आश्चर्यान्वित हुआ। जब पाठशालामें गया तब अपने गुरुसे कहा कि, उसी प्रकार मेरा लेख रातको कोई मेरे हस्ताक्षरमें लिखकर चला गया है। उसका शिक्षक रातके समय उसके घरमें आकर छिप रहा। वह विद्यार्थी लैम्प आगे रखकर भलीप्रकार सोचने लगा, परन्तु उसके ध्यानमें कुछ नहीं आया कि, उस लेखको लिखें। अपने पलँगपर अचेत होकर सोगया। कुछ कालके पीछे पुनः अपने पलँगसे उठा। पूर्वानुसार लेख लिखके भली प्रकार प्रस्तुत करके फिर अपने पलँगपर सो गया। फिर सबेरे जब वह अपने पलँगसे उठा, उसके पहले उसका शिक्षक उस कमरेके बाहर निकल गया। वह विद्यार्थी अपना लेख उसी प्रकार लिखकर पाठशालामें गया। शिक्षकसे कहा कि, मेरी दशा तो पूर्वानुसारही हुई। न जाने मेरा लेख मेरे हस्ताक्षरमें कौन लिख जाता है। यह बात सुनकर उसके शिक्षकने कहा कि, ऐ लड़के ! यह सब तेराही कार्य