भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 816

शेष यहूदी—एक पशुका नाम है, उसका चेहरा मनुष्योंकासा है, दाढी मूँछ आदि सब कुछ है, दो पर भी हैं उसके आकारसे ऐसा प्रतीत होता है कि, यह कोई श्रेष्ठ है ॥ ६ ॥

अजीबुलखिलकत्—पर्वत बुकीस पर एक पशु उत्पन्न होता है, यह बड़ा बलिष्ठ होता है। इसका चेहरा सुन्दर युवककासा होता है। इसके मूँछ दाढी कुछ नहीं है, इसके शिरपर गायकेसे दो सींगें हैं, बाकी शरीर शेरकासा है, कम्बर मोटी है, बाघकीसी पूँछ और डुमका सिरा गुच्छेदार है। उसकी पूँछमें तीन या चार जगहोंमें गिरह हैं वे काले हैं। उसके पिछले दोनों पाँव आदमीके, अगले दोनों पाँव बैलकेसे हैं, नीचेकी टांगें ऊँटकीसी हैं, दो पर पक्षियोंके समान हैं ॥ ७ ॥

जिस समय नौशेरओं बादशाहके राज्यका समय आया तब उसने ईरानी टापुओं तथा भूमिकी सनद बनाई। जब वह बना चुका तब उस नदीमेंसे एक विचित्र पशु उत्पन्न हुआ। उसने आवाज दी कहा कि, ऐ बादशाह! तू मेरे रूपका है इस कारण तेरी यह सनद बन गई। उस पशुकी गरदन चेहरा और सिर, सुन्दर नौयुवककासा था। दाढी मूँछ कुछ नहीं थीं। उसकी लटोंके घूँघर-वाले सुन्दर बाल कंधेतक लटक रहे थे। उसकी पीठपर पक्षीके समान दो पर थे। उसका सारा शरीर शेर बबरके समान था, उसके चमड़े पर शेरकी तरह दाग थे, शेरकीसी उसकी पूँछपर पूँछका सिरा गुच्छेदार केवड़ेके फूलके समान था ॥ ८ ॥

उनका—कोहकाफमें जो जर्मरदके रङ्गका पहाड़ है। वह समस्त संसारको घेरे है। उसपर एक पक्षी रहता है उसको उनका कहते हैं। यह पक्षी बड़ा बलिष्ठ है। इसकी ग्रीवा शिर और मुँह एक सुन्दरी स्त्रीकासा है। उसके शिरपर ऐसे पर रहते हैं मानों बादशाही मुकुट धरा है। शेष शरीरका भाग समस्त पक्षीके समान है। यह बृहत् पक्षी है। इसके शरीरमें अन्यान्य पक्षी अपना घोंसला बनाया करते हैं ॥ ९ ॥

दो शिरके मनुष्य—एक पर्वतमें दो शिरके मनुष्य होते हैं ॥ १० ॥

छातीमें शिर—एक स्थानमें ऐसे मनुष्य हैं, जिनका शिर छातीमें होता है उस जगह नारियलके वृक्ष बहुत होते हैं ॥ ११ ॥

घुटनेके नीचे कान—एक स्थानमें ऐसे मनुष्य होते हैं, जिनका कान घुटनोंके नीचेतक पहुँचता है ॥ १२ ॥

श्वान मुख मनुष्य—सिकन्दर बादशाहने एक टापूमें इस प्रकारक मनुष्य