भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 824

कलन्दर और बन्दरोंको मिट्टीमें दबा सब माल असबाब लेकर अपनी राह ली। उनके हाथसे बचा हुआ वह बन्दर चोरोंके चले जानेपर बूक्षसे उतरा। चुपचाप दूर दूर तीनों चोरोंके पीछे २ चला गया। वे तीनों अपने गाँवमें पहुँच घर दाखिल हुये। तब उसने उस गाँवको भलीप्रकार पहचान लिया। उसकी राहपर अपने हाथसे चिह्न करता हुआ लट आया। वह बन्दर तहसीलदारके पास पहुँचा। तहसीलदारसे अपने हाथ और सिरसे इशारा करने लगा। तहसीलदारने बन्दरके इशारेसे बन्दरको दुःखी समझ चपरासियोंको आज्ञा दी कि, तुम बन्दरके साथ जाके देखो कि, वह क्या चाहता है। तहसीलदारने चपरासियोंको आज्ञा दी उस बन्दरने अपना शिर हिला दिया कि, चपरासियोंको मत भेजो। तहसीलदारने जमादारको आज्ञा दी। इसपर भी बन्दर प्रसन्न न हुआ। फिर तहसीलदार घोड़े पर सवार होकर जमादार चपरासियोंको साथ लेकर बन्दरके साथ चला। वह बन्दर तहसीलदारके आगे आगे चला। उस स्थानपर पहुँचा जहाँ वह कलन्दर दबाया हुआ था, वहाँ पहुँचा तो बन्दर उस भूमिपर हाथ मारने लगा। तहसीलदारने उस स्थानको खुदबाया। उससे कलन्दर तथा बन्दरोंकी लाशें निकल पड़ीं। फिर बन्दर इशारा करता हुआ तहसीलदारके आगे आगे चला सबको उस गाँवमें ले गया जहाँ कि, वे खूनी रहते थे। तहसीलदारने आज्ञा दी कि, गाँवके सब मनुष्य उपस्थित हों सब मनुष्योंको खड़ा कराके उस बन्दरसे कहा कि, तुम पहचानों इनमें तुम्हारा कौन चोर है। बन्दरने सबको देखकर शिर हिलाया कि, इनमें कोई नहीं है। तब तहसीलदारने पूछा कि, इस गाँवका कोई मनुष्य बाहर गया है? लोगोंने कहा कि, हाँ अमुक अमुक मनुष्य उपस्थित नहीं हैं। तब तहसीलदारने कहा कि, उन्हें शीघ्रही उपस्थित करो। वे भी सब मनुष्य उपस्थित किये गये। उस समय चोरोंने अपने मुँहपर राख इत्यादि मलकर अपना चेहरा बदल लिया कपड़े बाँध लिये जिसमें चेहरा न पहचाना जाय। जब वे तीनों चोर बन्दरके सामने आये तो उसने तुरन्त पहचान लिया। इशारा किया कि, चोर तथा हत्यारे ये ही हैं। बन्दरने अपनी उँगलियोंसे इशारा किया। तहसीलदारने तुरन्त ही उनको पकड़ लिया। उनका इजहार लिया गया, उनपर हत्या तथा चोरी प्रमाणित हो गयी। उस बन्दरके साथ न्याय हुआ। हत्यारोंको फांसी दी गई।

जर्मीनदारका बन्दर—एक जर्मीनदारके पास एक बन्दर था। वह एक दिन सो गया तो उसकी अपानबायु खुली। उसने जर्मीनदारकी चादर फाड़कर उसके मलमार्गके निकट चिल्लाना आरम्भ किया। जर्मीनदार जाग पड़ा। बन्दरकी