भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 840

बोरडरका कथन है कि, इङ्ग्लिस्तानमें एक हाथी था। उसके साथ एक मनुष्यने दिल्ली करके डेढ सेंरकी रोटीके साथ अदरकके टुकड़े मिला पकाकर खिला दिये। वह हाथी अज्ञान वश खा गया। कुछ क्षणोंके पीछे उसको बड़ी गर्मी जान पड़ी। उसने अपने महावतसे जल मांगा, उसने छः डोल पानी दिया। वही डोल पकड़कर उस हाथीने जिसने रोटीके साथ अदरक दिया था उस मनुष्यको ऐसा मारा कि, वह मर जावे वरन् वह नहीं मरा। एक वर्ष पीछे वही मनुष्य पुनः उसी हाथीके समीप आया, पुनः दो प्रकारकी रोटियाँ लाया। अच्छी रोटी तो हाथीने खाली जब गरम रोटी देखी तो क्रोधसे उस मनुष्यकी कुरती पकड़ ऊपरको उठाया। कुरती की आस्तीन निकल गई। वह अधमुआ होकर पृथिवीपर गिर पड़ा जो हाथीकी सूँडमें उसके कुरतेकी आस्तीन रह गई भी उसके टुकड़े टुकड़े करके उस मसखरेके सिर पर मारे।

शिकारीको दण्ड—बहुतेरे अंग्रेजी अफसर हृन्शके देशके हाथियोंका आखेट करने गये। उनमें एक अफसर बड़ा निडर शिकारी था, वो ठीक निशाना मारता था। उसने एक हाथीको घायल किया। उसने हाथी पर गोली मारी तो गोलीने इस पर भली प्रकार फल न दिखाया, हाथीके शरीर में ठण्डी हो गई। वह क्रुद्ध हाथी भयानक हो उन अफसरोंकी ओर झपटा। अन्यान्य सब अफसरोंको छोड़कर उसीको पकड़ लिया जिसने कि, उसको गोली मारी थी। उसको पकड़कर ऐसे जोरसे पृथिवी पर पटका कि, उसका प्राण निकल गया। उसके शवको चूर चूर कर धूलमें मिला दिया। यह भयानक काण्ड देखकर समस्त अफसर भाग गये। पर दूसरे दिन पुनः उसी स्थानपर आ उसकी हड्डियोंका चूर्ण एकत्रित करके वहीं गाड़ दिया।

आसक्ति—जार्डनड सप्लाटसमें एक घरैला हाथी रहता था। वह एक छोटी बालिका पर आसक्त था। नित्य प्रातःकाल वह उस स्थानपर उस लड़कीको देखकर प्रसन्न होता था, वह लड़की भी हाथीको देखकर प्रसन्न रहा करती थी। जब वह हाथी आता तो धीरेसे अपनी सूँड लड़की की बगलके भीतर चला इशारा करके चला जाता था।

बच्चेका माँ पर प्रेम—शिकारियोंने एक हथिनीको मारा तो वह मर गई। उसका एक छोटा बच्चा था। वह माताके दुःखके कारण चारों ओर घूम कर चिल्लाने लगा। उस हथिनीके साथी अन्यान्य हाथी तो भाग गये पर उस बच्चेने माताका शव नहीं छोड़ा। शिकारियोंको वह रात वनमें बीती प्रातःकाल वे सब उस बच्चेके निकट आये उसको बहुत कुछ धीरज धराने लगे पर